#Kavita by Shabnam Sharma

प्रार्थना का मैदान,   बच्चे और हम सब, प्रथम चरण प्रार्थना की समाप्ति पर प्रधानाचार्य ने अपने विचार साँझे किए, ‘‘भारतीय हैं हम, ‘‘ये वैलनटाइन डे’’ हमारा मातृ-पिता दिवस भी तो हो सकता है, कौन कर सकता, धरती पर वो कुरबानियाँ, जो माँ करती अपने हाथ जलाकर, गीले बिस्तर में सो कर और रतजगे कर। हमारी जरूरतों की पूर्ति हेतू भूल जाता पिता अपना पुराना जूता बदलना, बदलवा लेता दर्जी से फटा कमीज का काॅलर,…

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# Bal Kavita by Ramesh Raj

।। हम सावन के रिमझिम बादल ।। —————————————— बहुत दिनों तक सूरज दादा की तुमने मनमानी गर्म-गर्म अंगारे फैंके और सुखाया पानी। प्यासे-प्यासे जीवजन्तु सब नदिया नाले सूखे लेकिन तुम ऐसा करने में कभी न बिल्कुल चूके। किन्तु समझ लो और इसतरह कुछ भी नहीं चलेगा हरा-भरा खेत बिन पानी कोई नहीं जलेगा। हम सावन के रिमझिम बादल अब बरसायें पानी हम धरती पर फूल खिलायें खुश हो कोयल रानी। -रमेशराज

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#Kavita by Avdhesh Kumar Avadh

नहीं  फालतू  कहकर  सबको, देना  एक   तुला    में   तोल l कुछ डाकू, कुछ चोर उचक्के, कुछ  नेतागण  हैं  अनमोल ll   नेता,  लाल,   बहादुर,   शेखर, भगत सिंह,     सरदार पटेल l बिस्मिल,रोशन,अटल,जवाहर, जेपी,  बीपी,  तिलक, बघेल ll   ऐसे  अगणित   ध्रुव   तारें  हैं, जिनपर शीश स्वयं झुक जाय l अब  तो  जागो  मीत   हमारे, अवध सभी को रहा जगाय ll   अच्छे  को  अच्छा  कहना है, और  बुरे  को  कहें   खराब l सबके  लिये  नहीं जाया…

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#Kavita by Jasveer Singh Haldhar

छंद–सरस्वती वंदना ————————- बुद्धि का विकास कर,कंठ नें प्रवास कर । वीणा पाणी काव्य का अभय दान दीजिये।। शब्दों का दान देकर ,छंदों का ज्ञान देकर । मात शारदे मेरी वाणी को मान दीजिये ।। शब्दों से श्रष्टि को भरो ,अपनी सुदृष्टि धरो । राष्ट्र हित आलाप  का वरदान दीजिये ।। सुबुद्धि वाहिनी मैया, पतित पावनी मैया। छंदों के निर्माण का सही विज्ञानं दीजिये।। हलधर -9412050969

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#Muktak by Dr. Sulaxna Ahlawat

बिना मोहब्बत किये यहाँ किस्सा ऐ मोहब्बत कौन लिखता, चोट ना लगती दिल पर तो शब्दों में वो दर्द कहाँ दिखता। लाख मना करे कोई बिना मोहब्बत किये लिखता हूँ मैं, पर ईमान तो उसका भी जानता है सच कब तक है छिपता।  –   डॉ सुलक्षणा अहलावत  

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#Gazal by Jyoti Mishra

बेदर्द मोहब्बत का अजब सा ये फसाना है जिनसे मिली बेचैनी उनसे ही सुकूं पाना है   माना कि मोहब्बत में मिलना नहीं आसां है पर दिल जो जिद्द पर  आए फिर सैकड़ों बहाना है   इक रात के लिए चंदा को मैने  छत पर बुलाया है कुछ ख्वाब मेरी पलकों पर संग तुझको  सजाना है   इन  ऑखों से अश्कों को मोहब्बत हो गई जैसे है वैसे ही किसी रोज़ मुझे तुझको पाना है…

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#Kavita by Gopal Kaushal

गौरैया ** गौरैया को  देख अचरज  होता  है कि हमारे संग सहजता रह लेती है । हमने कुत्ते,बिल्ली,घोड़े,तोते  पाले पर गौरैया तो मेरे घर खुद आ जाती है ।। इंसान जहाँ भी गया यह हमसफर रही मच्छरों की तरह ये खून नहीं चूंसती है । बल्कि यह तो इंसान के भोजन में से कुछ अंश चुगकर अपना पेट भर लेती है ।। इतना हीं नही अपने आसपास में व्याप्त कीटों आदि को खाकर गंदगी दूर…

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#Gazal by Vikash Raj

जाने जाँ मैं दूर तुमसे इस कदर हो जाऊँगा , तुम तो क्या, सारे जहाँ से बेखबर हो जाऊँगा ।   फिर भी मेरे साथ में आशीष है आकाश भर , तुमने तो बोला था कि मैं दर बदर हो जाऊँगा ।   था अभी खामोश जो बज्मे सुखन में तो मियाँ , तुमने क्या सोचा था कि मैं बेअसर हो जाऊँगा ।   तुम अँधेरे से कभी दहशत न करना दोस्तों , रात आने…

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#Kavita by Uday Shankar Chaudhary

वह भारत देश हमारा है —————————————– माथे पर है ताज हिमालय  बहती गंगा की धारा है चरण धोय सागर जिसका वह भारत देश हमारा है   है गोद लिए जिसको प्रकृति सुर्य चंद्र गुण गाते हैं पर्वत नदियां झड़नें सागर जहां अपना प्यार लुटाते हैं जहां बसंती मौसम हो कोयल की मीठी ताने हों गेहुं सरसों की फुलों पे भंवरों के सुमधुर गाने हों फलों से झूमती डाली हो प्रकृति करती रखवाली हो जहां खेत…

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#Kavita by Kumari Archana

“बरस जाओ बादलों तुम  आज”   बरस जाओ बादलों बिन काले मेघो के!   बरस जाओ बादलों बिन सावन के!   भींग जायें मेरा तन मन बिन प्यार के बूँदों के!   नाचूँ में मगन हो के बिन बालम के!   अब तो ना तरसाओ बादलों आ जाओ मेरे बालम बन के!   मेरा हाथ थामने के लिए वो तो ना आये!   बरस जाओं बादलों तुम आज!   कुमारी अर्चना पूर्णायाँ,बिहार

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#Kavita by Surendra Kumar Singh Chance

एक गीत समाज के अंतिम के लिए।   तोड़के तारे लाया हूँ तुम गुमसुम गुमसुम बैठे हो एक बार ही बोलो ना तेरे लिए लाऊँ क्या।   माना बहुत सताये हो दुनिया से ठुकराये हो हंसी ख़ुशी मुस्कान दिल्लगी सब कुछ गवां के आये हो पर इतना ही क्या कम है कितना सुंदर जीवन है मैं भी इस पर रीझ गया अपनी दुनिया भूल गया आशा ढूंढ़ के लाया हूँ तुम उलझे उलझे बैठे हो…

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#Muktak by Dr. Krishan Kumar Tiwari Neerav

हाथ में सत्ता है किसके साथ में किसके जमाना, तब तलक ही है ये दुनिया जब तलक है आबदाना, कौन तीरंदाज कितना इस जहां में जानता हूं– बोलता है वह शिकारी लक्ष्य पर जिसका निशाना ** सूरज निकल रहा है कैमरे की नजर में, दीपक भी जल रहा है कैमरे की नजर में, हैरत है मुझे फिर भी चोरी नहीं रुकती— हर काम हो रहा है कैमरे की नजर में ! ** उठाने को तो…

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#Kavita by Sanjay Ashk Balaghati

इतना कुछ हो गया फिर भी… कुछ ना हुवा तो जाहिर है ठोस कदम उठाने और कडी निंदा करने मे हम माहिर है। —- वो जवानो के शीश ले गये और ये चैतावनी ही फेक रहे है। माईक के सामने भौकने वालो का तमाशा कई दिनो से देख रहे है।। —— आये दिन वो सीमा पर देखो खूनी खैल सेना संग खेल रहे है। अपने यहां युद्ध करने के बदले नेता मनमानी भाषण पेल रहे…

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#Kavita by M.D.Juber

सरदार (कविता)   मैं तो हु हवा,छूकर गुजर जाऊँगा गुजर गया तो, आँधी मैं कहलाऊँगा मैं तो हु एक मस्त बहार नजरों से भी आए प्यार मैं तो हुँ सरदार,,,,,,,,,,,,,,2   समस्त गोकुल का मैं तो ग्वाला हरि नाम का जाप लगाए प्यार मिले उपहार या तीर चले या तलवार मैं तो हुँ सरदार,,,,,,,,,,,,,2   दुनिया की तो बात नूरानी हो ईद या दीवाली कहि हो गमो का खुमार मैं तो हुँ सरदार,,,,,,,,,,,2   युद्ध…

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#Shayari by Jitendra Kariya ‘ jeetu musafir’

ऐ खुदा सब तेरे रहमो करम पर पलते है , नेक होते है वो बन्दे जो तेरी राह पर चलते है , फिर क्यों समझती है दुनिया उन्हें काफिर , हर इज्जतदार जगह से वो होकर बेआबरू निकलते है ।   **:  काम कोई छोटा या बड़ा नहीं होता , मुक़द्दर रास्ते पर कही खड़ा नहीं होता , मार दे मेहनत का हथौड़ा कर्म पर , खुदा भी अपने फैसले पर अड़ा नही होता ।

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#Gazal by Peeyush Gupta Gagan

तुम गमों को सहो तो सही हौसले से रहो तो सही   तीरगी खुद ही मिट जाएगी दीप बनकर जलो तो सही   जग ये पीछे चलेगा मगर पहले कुछ तुम बनो तो सही   वो मुरादें सुनेगा सभी उसके दर पर झुको तो सही   उन शहीदों के जैसे ‘गगन’ मुल्क पर तुम मरो तो सही   पीयूष गुप्ता ‘गगन’

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#Kavita by Madhu Mugdha

अहसास एक रात की सांय सांय सा गूंज रहा था आस पास निगाह डाली सब सो रहे थे ट्रेन अपने रफ्तार से दौड़ रही थी और उतनी रफ्तार से मेरा मन रात के 1,,३० बज रहे थे नींद आखो से दूर थी । रायपूर से इलाहाबाद आ रही हूं लेकीन मन वहीं खोया हुआ था । कितने सालो बाद सब इकठ्ठे हुए थे कैसे इतनी जल्दी दीन बीत गये पता ही नही चला । जैसे…

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#Kavita by Vivek Prajapati

रावत जी की पाठशाला में एक और नवगीत का प्रयास-   क्यों अलसाये से बैठे हो समय बराबर बीत रहा है।   पाल रहा है मन तृष्णाएं अभिलाषा का छोर नहीं है पर प्रयास इस बार तुम्हारा किंचित भी इस और नहीं है उठ बैठो अब तो सोने की घड़ियाँ भी जब निकल गयी हैं आंखें तो खोलो फिर देखो दुनिया कितनी बदल गयी है।   कोई देखो हार गया है देखो कोई जीत रहा…

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"#Kavita by Vivek Prajapati"

#Kavita by Rifat Shaheen

वो मेरे लिये सिगरेट की तरह थी उसकी तलब बेचैन करती थी मुझे मैं उसे टटोलता होंटों से लगाता वो सुलग उठती मैं आँखे बंद किये उसे पीने लगता उसकी सुलगन से बेखबर सुरूर में उतरता जाता वो सुलग कर धुंआ देने लगती पर कहाँ परवाह थी मुझे उसके दर्द की मुझे तो अपनी लज़्ज़त की धुन थी वो पल ,वो सुरूर,आह!… कितना नशीला था मेरे लिये और वो खामोश सुलगती रही सुलगती रही फिर…

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"#Kavita by Rifat Shaheen"

Haiku by Ishq Sharma

हाइकु ऐ इश्क़ ** लहलहाती। हरी भरी धरती।। खिलखिलाती।।।1   मुस्काती कली। गुड़िया खिली खिली।। खेलेने चली।।।2   वन जंगल। बिटिया है चिड़िया।। चहके जग।।।3   दूषित वायु। घर घर वाहन।। कष्ट में पृथ्वी।।4   मिट्टी का तन। भंवरा मेरा मन।। तुम सुमन।।।5   पिंजरा बंद। रो रही चुनमुन।। कोई “चूँ” सुने।।।6   घड़ी की सुई। चुभता पल पल।। रोक दे कोई।।।7   कोई क्यू सुने? सारे काने बहरे।। कहे हमे क्या.???8   सुख त्याग…

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"Haiku by Ishq Sharma"

#Gazal by Aasee Yusufpuri

मन्ज़र भोपाली के नाम ————————— बेशक तू आसमाने अदब का है आफ़ताब ‘मन्ज़र’ तेरा   जवाब  नहीं  तू है लाजवाब   तू ख़ुश  गुलू   है  तेरा तरन्नुम है  बेमिसाल तेरा हर एक शेर मुकम्मल है  इक किताब   अफ़कार की  रसाई जो दुनियाए  हू में है तेरे   तख़य्युलात   का   कोई नहीं जवाब   क़ौसे कुज़ह है ये  तेरा मजमूआए कलाम अहले नज़र भी देखें तेरा  हुस्ने  इन्तख़ाब   करता है ये ज़माना तेरी  अज़्मतों की क़द्र…

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"#Gazal by Aasee Yusufpuri"

#Kavita by Ajeet Singh Charan

गीत   बिछुड कर तुम से मेरे दिल का है क्या हाल बतलायें बस दुआ करना कि तेरी याद ना आये   रात के साये में जब जुगनू भी सो जाये चांदनी भी चांद के आगोश हो जाये दूर पीपल पर कोई चकवा जो बतलाये तब दुआ करना कि तेरी याद ना अाये (1)   कभी होठों पे तेरे जो मेरा ये नाम आ जाये हसी बारिशों से भीगी यादें शाम आ जाये हो उठे…

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"#Kavita by Ajeet Singh Charan"

#Kavita by Nirdosh Kumar

(नागफनी क्यों रूठ गया?)     तपते मरू भूमि में जल का सोता फूट गया जाने क्यों?क्यों.. क्यों.. क्यों.?वह नागफनी रूठ गया मिथक बना था प्रश्नों का जो अब वह टूट गया स्याह आवरण अवसाद सभी पीछे छूट गया उल्लास हर्ष का लबालब बांध आज फूट गया व मधु से भारित मधु का दुर्गम छत्ता टूट गया व अभिरंजित अभिसिंचित तन भी देखो भीग गया चंचल मन अनबूझे प्रश्नों का उत्तर सीख लिया जाने क्यों?क्यों..…

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"#Kavita by Nirdosh Kumar"

#Kavita by Balwant Bawala

माँ माँ तुम जीवन हो ये जीवन तुमसे है धन,धनी या निर्धन हो अंश तुम्हारा सबमें है शान्ति सुकून दे जो सबको ऐसी तुम उपवन हो माँ तुम जीवन हो   बरसाये तू प्यार सदा ममता की तू मूरत है प्यार तेरा हटे कभी न नजरों से तू ऐसी भोली सूरत है ममतामयी तेरा वास जहाँ हो लगे झोपड़ी जैसे भवन हो माँ तुम जीवन हो   खुद भूंखी हो लेकिन भूंख मिटाती फिरती है…

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"#Kavita by Balwant Bawala"

#Kavita by Vinod Bairagi

  राष्टीय हित के  गीत में सुनाना चाहता हूँ   गांव गांव में विकास करना चाहता  हूँ   वो सो रहे हैं  जो सरकारी कुर्सी पे   जाग जायें तो में जुग्गी जोपडि बताना चाहता  हूँ  ।   सरकारी कुर्सी में भी देखो बस्टाचार दिखाई देता हे गंगा  नर्मदा में  अपना पाप धोता दिखाई देता हे।   सरकारी कुर्शी पे  में भी सर्मिंदा हु   राष्टीय हित गीत में सुनता हु   हो गये पैदा…

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"#Kavita by Vinod Bairagi"