#Kavita by Brij Vyas ( Bhagwati Prasad Vyas “Neerad” )

” आहत हो रहा , गिलहरी सा मन ” !! जातियों में बंट गये हैं ! समूहों में डट से गये हैं ! स्वार्थपरता की ललक है , लक्ष्य से भी हट गये हैं ! राजनीति अवसर तलाशे – मच रहा क्रंदन !! अपने पशुधन को सम्भालें ! कट रहे उनको बचा लें ! खाने को तो है बहुत कुछ , अहिंसा भी आजमां लें ! बीफ़ प्यारा उनको कह दें – ना मथें जीवन…

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

हर शख्स निगाहों में प्यार लिए रहता है! हर वक्त जेहन में खुमार लिए रहता है! जब कभी रुक जाती है राह मंजिलों की, दर्द का जिगर में बाजार लिए रहता है!

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#Kavita by Neeloo Neelpari

हिदायतें ~~~~ हिदायतें.. बस हिदायतें ये मत करो वो मत करो ऐसे क्यों किया अरे जब बोला था मत किया करो न फिर सोचती ही क्यों हो इतना ये सब मत सोचा करो, न उफ़्फ़्फ़… दिन के चौबीस घंटे चौबीस सौ हिदायतें संवाद से ज़्यादा बस तेरी हिदायतें इन्हीं हिदायतों में ढूँढती हूँ कहीं छुपा तो ज़रूर है तेरा प्यार..

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#Gazal by Rishabh Tomar Radhe

किसी को इस कदर चाहो,कि खुद को उसका दिल बनालो करो उससे इतनी मोहबत की मोहबत का आशियाना बनालो मेहबूब जो कही चाँद बन जाये या फिर कोई जर्द सा सितार तो तुम भी मोहबत में अपने आप को आसमाँ बनलो जुबाँ से बातें करो परपल इश्क मोहबत और प्यार की और दिल को दूसरों को खुशी देने वाला गुलाब बनालो वादा निभाओ मोहबत का ‘ऋषभ’ इस कदर कि मोहबत को विस्वास का प्यार आशियाना…

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#Lekh by Pankaj Prakhar

स्त्री और नदी का स्वच्छन्द विचरण घातक और विनाशकारी ** स्त्री और नदी दोनों ही समाज में वन्दनीय है तब तक जब तक कि वो अपनी सीमा रेखाओं का उल्लंघन नही करती | स्त्री का व्यक्तित्व स्वच्छ निर्मल नदी की तरह है जिस प्रकार नदी का प्रवाह पवित्र और आनन्दकारक होता है उसी प्रकार सीमा रेखा में बंधी नारी आदरणीय और वन्दनीय शक्ति के रूप में परिवार और समाज में रहती है| लेकिन इतिहास साक्षी…

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"#Lekh by Pankaj Prakhar"