#Kavita by Shambhu Nath

होमवर्क करना पड़ता है || किस बात की होती छुट्टी || जब देखो तब मम्मी मेरी || पिलाती डाँट की घुट्टी || घूमने कही जाने न देती || घर पर ही खेलू कोई खेल || कहती करो पढ़ाई जम के || नहीं तो हों जाओगे फेल || शैर सपाटा जाने नहीं देती || बाँध के हरदम रखती मुट्ठी || जब देखो तब मम्मी मेरी || पिलाती डाँट की घुट्टी || कुछ दिन ही है स्कूल…

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"#Kavita by Shambhu Nath"

#Lekh by Pankaj Prakhar

“नज़रे बदलो नज़ारे बदल जायेंगे” आपकी सोच जीवन बना भी सकती है बिगाढ़ भी सकती है सकारात्मक सोच व्यक्ति को उस लक्ष्य तक पहुंचा देती है जिसे वो वास्तव में प्राप्त करना चाहता है लेकिन उसके लिए एक दृण सकारात्मक सोच की आवश्यकता होती है| जब जीवन रुपी सागर में समस्यारूपी लहरें हमे डराने का प्रयत्न तो हमे सकारात्मकता का चप्पू दृण निश्चय के साथ उठाना चाहिए | यदि आप ऐसा करते है तो निश्चितरूप…

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#Kavita by Ved Pal Singh

हम बहुत करते हैं जब करते हैं ……… हम वो नही करते हैं जो सब करते हैं, मगर सब कहते हैं कि गजब करते हैं। भले गुज़ार दें वक्त खाली कितना भी, मगर हम बहुत करते हैं जब करते हैं। ज़िंदगी ने हमें सताया भी है कई बार, मगर फिर भी उससे हम कब डरते हैं। हम चलने वाले हैं उसूलों की राहों पर, खुदा में यकीन बड़ों का अदब करते हैं। रौशन होगा नाम…

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"#Kavita by Ved Pal Singh"

#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat

उन क्षणों का दर्द कोई नहीं समझ सकता इस संसार में  जब तक वो क्षण जिंदगी में ना आएं  घर में छोटा था मैं पर अचानक से बड़ा बन गया मैं मुझे हालातों ने बड़ा बना दिया था हस्पताल के उस पलंग पर  मेरी आँखों के सामने  वो पिता जी की लाश नहीं थी वो तो जिम्मेदारियों की गठड़ी थी ना जाने कहाँ से मेरे अंदर इतनी ताकत आई एक पल में उस गठड़ी को…

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"#Kavita by Dr. Sulaxna Ahlawat"

#Shayari by Sumit Kumar Pandey

कभी तो फ़ुर्सत निकाला करो यारों ज़िंदगी में ये मोहब्बत वो सब है जो रोज़ नहीं हुआ करती.. ** #मुक्तक जेठ की तपती दुपहरी जब भीषण होती है आँख ही नहीं केवल तब ज़िस्म भी रोती है अमीरों के मुक़द्दर का तो ज़नाब कुछ नहीं पता ग़रीबों के घर में मगर साहब एसी नहीं होती है.. ** माँ वो अज़ीम ख़ुशब़ू है जो महसूस हरदम होती है हाँ ये बात और है कभी ज़्यादा कभी…

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#Kavita by Brij Vyas

” हंसी हमारा गहना है ” !! परिधान सजे रंगीले , आभूषण भी बड़े कटीले ! फूलोँ से है प्यार बड़ा , ऐसे लदे , लगे सजीले ! उन्मुक्त धरा ,उन्मुक्त गगन – उन्मुक्त हमे रहना है !! भाव भंगिमा सुमधुर , नयन नशीले बड़े मदिर ! आतप सहती है काया , नहीं थकें हम पल भर ! राह कंटीली है पथरीली – खुशबू जैसा बहना है !! प्रकृति की कलकल , जीवन है यहां…

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#Kavita by Vikram Gathania

स्पंदित चेतन सृष्टि के खूबसूरत चेहरे युवा स्त्रियों के खिले गुलाबों की मानिंद स्पंदित चेतन हैं सृष्टि के वे गुलाब हैं उगे हुए संस्कारित जो सलवार कुर्ता ब्रा के संस्कारों से तुम यह सब नहीं कर सकते इसलिए तुम सलवार कुर्ता ब्रा पहनी हुई अपने हिस्से की स्त्री की तुलना किसी से  नहीं करते वह अद्वितीय है तुम्हारे लिए !

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

न करता कोई याद, तो ख़ुद ही याद कर लो ! टूटे हुए रिश्तों को, फिर से आबाद कर लो ! सर झुकाना है अपनों के लिए तो शर्म कैसी, दिल को गुबारों से, ज़रा सा आज़ाद कर लो ! हर दफ़ा ख़ामोशियों से काम होता नहीं दोस्त, बात कर के क्यों न, ख़ात्मा ए फसाद कर लो ! रूठों को मनाने में दिखता है बड़ा अपनापन, वक़्त मिल जाए तो, इसे भी अहसास कर…

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#Kavita by Neelam Sharma

आ दीप जला तू खुशियो का ……… आ दीप जला तू खुशियों का मिटा हर दुख का अंधियारा कुछ तो कर सर्व हित में के य़ाद करें तुझे जग सारा नव आशाओं का दीप तू बन, मोती भी बन और सीप तू बन ना -उम्मीदों की उम्मीद तू बन, सरहद पर बढती रंजिश में ,जोडे दिल जो वो प्रीत तू बन जो सुख दे सबके मन को, हाँ ऐसा सा संगीत तू बन तु सुर…

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"#Kavita by Neelam Sharma"

#Gazal by Rishabh Tomar ,Radhe

सब त्याग के मैं पत्थर नही बनाना चाहता मैं इंसान ही ठीक हूँ ईश्वर नही बनाना चाहता रिस्तों को निभाते निभाते बेबस हो गया हूँ अब रिस्तों के लिए खुद को मिटाना नही चाहता उस शख्स से बेपनाह मोहबत की थी मैंने इसी लिये उसको अब भुलाना नही चाहता किसी के दिल मे दीपक की तरह जलना है मुझे मैं किसी आरती के थाल में जलना नही चाहता श्रद्धा विश्वास त्याग समर्पण बेकार की बाते…

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#Kavita by Nadeem Khan

मैं बदला लूँगा तुमसे मैं हूँ बेटा किसान का देखा नहीं रूप तुमने अभी इस भोले किसान का मांगे ही तो सामने रख कर अनशन पर हम बेठे थे किसानो का ही नहीं क़त्ल किया तुमने हमारे अरमान का किसानो ने ही तुम्हारे जीवन को बचाए रखा है अकालो में भी तुमने ही साथ छोड़ दिया आने वाले कल के हिन्दुस्तान का गोली चलाई तुमने हिन्द के किसानो पर जो मेहनत की खाते है घाव…

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"#Kavita by Nadeem Khan"

#Shayari by Amit kaithwar mitauli

तुम्हें चाहने वालों की तादाद आज भी है. तू मुझसे ,मेरी बाहों से आजाद आज भी है मैं तो बर्बाद हो चुका हूँ कब का सनम. मगर मेरे दिल में तू आबाद आज भी है. – अमित कैथवार मितौली – – 9161642312 –

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#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

तेरी याद से खुद को आजाद करूँ कैसे? तेरी चाहत में खुद को बरबाद करूँ कैसे? लब्ज भी खामोश हैं बेबसी की राहों में, तेरी मैं तकदीर से फरियाद करूँ कैसे?

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#Kavita by Dharmender Arora Musafir

*दवा से जो नहीँ होते* दवा से जो नहीँ होते दुआ से काम होते हैं! जहाँ में आज भी ऐसे करिश्मे आम होते हैं!! :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: गलत राहों से जीवन में हमेशा दूर तुम रहना! बुरे हर काम के देखो बुरे अंजाम होते हैं!! :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: निराला सा चलन देखा जहाँ में आज लोगों का! बगल में है छुरी रखतें जुबां पे  राम होते हैं!! ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: दिलों में इस ज़माने के पनपती साज़िशें हरदम! बशर की जान…

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#Muktak by Lal Bihari Lal (Lal Kala Manch)

पर्यावऱण ** आबादी के दंश से पर्यावरण खराब । आबादी को रोक के, धरा करेंगे साफ।1। पेड़ों में ब्रम्हा ,विष्णु ,पेड़ो में श्रीराम। वन बचाने खातिर अब,लाल करो कुछ काम।2। जीव रहे तब तक जिंदा,जब तक इनमें जान। लाल खातिर है पादप,जस मानों भगवान।3। वन धरा से मत काटें ,इसे लगाना सीख । वरना सेहत ना रहे ,मांगे मिले न भीख।4। नेता भाषण रोज दे, पार्क में सरेआम।। उसके जाते हो गया ,सारा काम तमाम।5।…

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"#Muktak by Lal Bihari Lal (Lal Kala Manch)"

#Muktak by Annang pal Singh

खुशियाँ हृदय विचारिये , खुशियाँ आतीं दौड़ ! दुख का किया विचार तो,दुख का बनता जोड़ !! दुख का बनता जोड़, सोच की ताकत. भारी ! सकारात्मक सोच हेतु , करिये तैय्यारी !! कह ंअनंग ंकरजोरि,सोच पथ चलती दुनियाँ ! दुख सोचो दुख मिले , खुशी से मिलतीं खुशियाँ !!   : आत्मीयता , समझ वा गहन प्रेम की राह ! इससे अंतर्जगत में पैदा होती चाह. !! पैदा होती चाह , स्वभाव न बने अचानक…

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"#Muktak by Annang pal Singh"

#Kavita by Tej Vir Singh Tej

जय जय श्रीराधे…..श्याम ** कुंजन निकुंजन में खेल-खेल लुका-छिपी समझे हो मन-मांहि बड़े ही खिलार हौ। धार कें उंगरिया पै थारी बिन पैंदे वारी करौ अभिमान बड़े तीक्ष्ण हथियार हौ। देखौ रण-कौशल हू भागि भये रणछोर अरे डरपोक कहा भौंथरी ही धार हौ। हमऊँ हैं ब्रजबासी झांसे में यों नाय आवैं तेज भले कितने हो पर तुम गमार हौ।   खेल रह्यौ घात कर जीत की न बात कर घने देखे तेरे जैसे कृष्ण-नंदराय जू।…

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"#Kavita by Tej Vir Singh Tej"

#Kavita by Shabnam Sharma

पिता कन्धे पर झोला लटकाए, खाना व पानी लिये, देख सकते दौड़ते-भागते पकड़ते लोकल ट्रेन, बसें। लटते-लटकाते, लोगों की दुतकार खाते, कभी घंटे भर का तो कभी घंटों का सफर करते। ढूंढते पैनी नज़रों से, कहीं मिल जायक हाथ भर बैठने की जगह, मिल गई तो वाह-वाह, वरना खड़े-खड़े करते, पूर्ण वर्ष ये सफर। पहुँच दफतर, निबटाते काम, खाते ठंडा खाना, पीते गर्म पानी, बचाते पाई-पाई। लौटते अंधेरे मुँह घर, कल फिर से आने की…

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"#Kavita by Shabnam Sharma"

#Kahani by Vishal Narayan

हुआ यों कि पति ने पत्नी को किसी बात पर तीन थप्पड़ जड़ दिए, पत्नी ने इसके जवाब में अपना सैंडिल पति की तरफ़ फेंका, सैंडिल का एक सिरा पति के सिर को छूता हुआ निकल गया।   मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन पति ने इसे अपनी तौहिनी समझी, रिश्तेदारों ने मामला और पेचीदा बना दिया, न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब रिश्तेदारों ने इसे खानदान की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि…

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"#Kahani by Vishal Narayan"

#Kavita by Dr. Sarla Singh

एक छोटी सी बच्ची ।   रेल खड़ी होते ही , भागती इधर से उधर । थामे हुए अपने ही कद का, एक बोरा पैबन्द वाला । भर रही उसमें वो भोली, फेंके हुए खाली पड़े बोतल पानी के। रेल की पटरियों पर दौड़ती , पा सके ताकि अधिकतम  । खुद से बड़े बोरे के कारण , बार कई वो गिरती , लड़खड़ाती गिरती उठती । छोड़ती  फिर भी ना , आस अपनी वो  बच्ची…

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"#Kavita by Dr. Sarla Singh"

#Kavita by Aparna Shiv Sharma

खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं । जिसे भी देखो परेशान बहुत है ।।   करीब से देखा तो निकला रेत का घर । मगर दूर से इसकी शान बहुत है ।।   कहते हैं सच का कोई मुकाबला नहीं । मगर आज झूठ की पहचान बहुत है ।।   मुश्किल से मिलता है शहर में आदमी । *यूं तो कहने को इन्सान बहुत है  

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"#Kavita by Aparna Shiv Sharma"

#Kavita by Kumari Archana

“शहादत” ** शहीद हो गई किसी माँ की गोदी, दुश्मनों  से लङते लङते सीमा पर, जिस लाल  को नौ महीन कोख में पाला था, आज उसी लाल को  खून से सना तरंगे में लिपटा देख, माँ की आसुँअन धारा ना रूकती, कभी माँ के आचंल में छुप जाया करता, दुसरोंके साथ शैतानीयाँ करके, आज वही आंचल ना बचा सका दुश्मनों से, गर्व से माथा कर सम्मान पा रही, पर दर माँ का सीना फट रहा,…

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"#Kavita by Kumari Archana"

#Kavita by Ram Niwas Kumar

युवाओं को आशीष🌹   कृपा रहे ईश की तुमपर, तुम बढ़ो दिन-रात मैं चाहता हूँ तन-मन से, विहँसे नवल प्रभात ।   बाधा-विघ्न न आवै पथ पर, रहो सदा गतिमान नन्दन-वन सा सुरभित हो, जीवन का उद्यान ।   बढ़े चलो जीवन भर तुम, हर पल नया आयाम विवेकानंद  आदर्श हैं  तेरे, करो संघर्ष सुबह औ शाम ।   दुनिया में युवा बहुत हैं, उनके कितने नाम निकल जाओ तुम सबसे आगे, कृपा करें श्रीराम…

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"#Kavita by Ram Niwas Kumar"

#Kavita by Prerna

-‘बाबुल’   धीरे बोलो गुस्सा मत करो, मुस्कराते रहो ये सब तुम सिखा गये।   विद्या का ज्ञान संस्कारो का पाठ, सिखाकर डोली में विदा कर गये।   बाबुल तुम छोड़कर कहा चले गये।।   त्याग ,ममता,स्वाभिमान से जीना सिखा गये,   आत्म ग्लानि से परे सर उठाकर, जब हम जीना सिख गये,   बाबुल तुम फिर भी छोड़कर चले गये।।   आपकी आत्मा की शांति, पारिवारिक ऊँच नीच को भूल,   हँसकर हर घूंट…

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"#Kavita by Prerna"