#Kavita by Sudha Mishra

सुनो हुक्मरानों सुनो…   सुनो हुक्मरानों सुनो  आँख से परदा उठाओ अपनी-अपनी गद्दी से उतरकर बताओ क्या खूब बेटी बचा रहे हो क्या खूब बेटी पढा रहे हो कहाँ रहते हो ,कहाँ सोते हो,कहाँ जगते हो? जो महीने तक भी नींद नहीं खुलती और जो बेटियाँ झेल रही हैं जान से हाथ धो रही हैं… बस तुमसब को नहीं दिखतीं नहीं देख पाते दर्द किसी का तो गद्दी से उतारकर रहेंगे होश में आओ प्रशासन…

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"#Kavita by Sudha Mishra"

#Kavita by Vikram Gathania

उम्मीद करूँ बहेगी गंगा  ? मुझे अफसोस है कि जो जो दिखते हैं मुझे नुक्श मेरे आसपास की चीज़ों में वो न होते कदाचित अगर मैं उपस्थित होता उस वक़्त जब गढ़ा जा रहा था चीज़ों को चौकन्ना तो रहता हूँ मैं पर नुक्श नहीं जाते झल्लाता हूँ अपने पर या हँस जाता हूँ नासमझी पर लोगों की गुस्से में दबी एक हँसी ! मंदिर में जैसे एक गंगा पथ ही था बनाना कि बहे…

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"#Kavita by Vikram Gathania"

#Kavita by Dr. Rahul Shukl “Sahil”

विद्धुल्लेखा/शेषराज छंद – शिल्प:- [मगण मगण(222 222), दो-दो चरण तुकांत,6वर्ण] प्रभु की माया देखी तेरी माया, है तेरा ही साया, बोलो राधे राधे, कान्हा मोहे साधे। माँ गंगा की धारा, तू ही मेरा सारा, तू है मेरी राधा, मैं हूँ तेरा आधा। कान्हा तो है काला, राधा गोरी माला, गाना गाओ सारे, प्राणी बोलें नारे। कैसे बीते रैना, मेरे भीगे नैना, माता दूरी टारो, पूतों को भी तारो – डाॅ• राहुल शुक्ल साहिल

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"#Kavita by Dr. Rahul Shukl “Sahil”"

#Kavita by Jaya Singh

क्यों करते हो भरोसा कि , आईना हमेशा सच ही दिखाता है ? जैसा तुम खुद दिखना चाहते हो, वह तो बस वही दर्शाता है। क्यों करते हो भरोसा कि, आईना हमेशा सच ही दिखाता है ? मुस्कुराते हुए सामना करने पर जो, अन्तर्आत्मा की पीङा हर बार छिपाता है। क्यों करते हो भरोसा कि , आईना हमेशा सच ही दिखाता है ? जो खुद पारदर्शी नहीं वह , आर-पार की हकीकत क्या बताता है।…

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"#Kavita by Jaya Singh"

#Kavita by Manish Prakhar

जेल में मिलाई के दौरान इंतजार में अपना अनुभव दिल्ली का एक अख़बार, जिस पर पैर पड़ रहे बार -बार ! मैने उसे प्यार से उठाया, हाथ से पोंछा लगाया ! दंग रह गया यह देखकर, अपने माथे पर हाथ फेरकर ! चारों तरफ बुजुर्गों के फोटों का जाल, दिख रहा था उसमे बुजुर्गों का बुरा हाल ! किसी का छीना था अपनों ने प्यार, किसी को मरने के लिए किया लाचार ! कोई था…

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"#Kavita by Manish Prakhar"

#Lekh by Brijmohan Swami

बृजमोहन ‘बैरागी’ का चिंतन —————————————— एक यतार्थ आलोचना – प्रवीण चारण बृजमोहन स्वामी ‘बैरागी’ (जन्म 1 जुलाई सन् 1995) , हिंदी प्रगतिवाद-यतार्थवाद के युवा लेखक और कवि हैं। इस वर्ष आगामी जुलाई में ‘बैरागी’ जी का तेईसवां जन्मदिन भी आ रहा है। ‘बैरागी’ जी आधुनिक काल के युवा वर्ग में महत्वपूर्ण प्रगतिवादी लेखक हैं। यह महत्वपूर्ण बात है कि हिंदी आंचलिक लेखन के साथ साथ उनका विदेशी “काव्य केंद्रीकरण” पर काफ़ी ज़ोर रहा है। ‘बैरागी’…

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कभी क़ातिल रिहा, कभी मासूम लटक जाता है ! फरेबों के सहरा में, बेचारा सच भटक जाता है ! शराफ़त की औकात कुछ भी नहीं जमाने में, बदमाशियों के आगे, सब कुछ अटक जाता है ! अजीब सा आलम है इस बेसब्र शहर का यारो, यहां ज़रा सा मसला भी, दिलों में खटक जाता है ! लोग बिछाते हैं जाल कुछ इस कदर फरेबों का, कि ज़िन्दगी का सफ़र, अधर में अटक जाता है !…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"