#Shayari by Ishq Sharma

इश्क़-ऐ-चाँद ** धीरे – धीरे से बढ़ने  लगी  चाँदनी, तारे शरमा  गये  देख  के चाँदनी। बादलो में चमकती देखा चहुँओर, रूह  में  चाँद के है बसी चाँदनी।।   धीरे – धीरे से बढ़ने  लगी  चाँदनी, °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° चाँद तरसे कभी ना कभी चाँदनी, है मोहबत इनकी अमर कहानी।। ये हरयुग में देखा सभी ने कभी।। दुलहा चाँद तो है दुल्हन चाँदनी।।   धीरे – धीरे से बढ़ने  लगी  चाँदनी, °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° गर ठोस चाँद है तो कोमल…

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#Kavita by Rishabh Dev Sahu

आरजू ** आरजू भी उनकी थी , पूरी हो न सकी ।   तमन्ना जो मेरी थी , अधूरी हो न सकी ।   वो जा रही संसार में , और मै संसार से ।   राह में मिलन की, आस पूरी हो न सकी ।  –  ऋषभ

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#Kavita by Nirdosh Kumar

(शून्य…….?)     शून्य कहकर मेरा अपमान करो ना अस्तित्व बोध से मेरा सम्मान करो ना गुणा भाग में  मैं सब अस्तित्व मिटाऊँ और बैठ दाहिने सब अस्तित्व बढाऊँ कभी विश्व सर्वोच्च हलाहल कहलाऊं और दूजे बन पीयुष मैं इठलाऊं   कवि निर्दोष कुमार पाठक पेन्ड्रा रोड (छग) 9893453078

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#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati

  मेरे दिल मे तुम्हारी मोहब्बत का घर बना है ऐसे तुम्हे याद करना ईश्वर को याद करना है जैसे तुम्हे महसूस कर ही रोज जीते आया हुं अब तक तुम ही बताव राधा को श्याम भूलाये भला कैसे … संजय अश्क बालाघाटी 9753633830

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#Kavita by Ajeet Singh Charan

||पुरखे नहीं बदलते||   नहीं फूटता गुस्सा नहीं उबलता लावा भावना उड गई है सिगरेट के धुएं में भूख, डकैती, हत्या की घटनाएं बेईमानी के कालम बलात्कार के स्तंभ पढकर/देखकर भी दिल के किसी कोने का स्थायी भाव जागृत नहीं होता   सीमा पे लडते जवान कर्ज तले दबे किसान और नक्सली हमले रोज भावुक कर देते हैं सोशल मीडिया पर कहीं सड़क पर गाय काटकर कहीं जाति धर्म को बांटकर अपने अपने मसीहा छांटकर…

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#Kavita by Reeta JaiHind Arora

करो सूर्य नमस्कार खुशियाँ लुटाओ फैमिली संग कहीं घूम आओ दोस्ती जी भर निभाओ धूप हो या छाँव मौसम का आनंद उठाओ बारिश हो तो भीग जाओ गर्मी हो तो  गंगा स्नान कर आओ बिगड़ी सब सुलझाओ बातों में ना उलझाओ किसी को अपना बनाओ किसी के बन जाओ संडे मनाओ जी भर आनंद   – रीता जयहिंद

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#Kavita by Dipak Charlie

कुछ लम्हें ऐसे होते हैं जिन्हें मैं याद करता हूँ कवि के साथ वकील भी हूँ इसलिए कोर्ट, कचहरी की भी बात करता हूँ   एल० एल०-बी करने के बाद हमने एक दिन सोचा कि घरवाले भी परेशान करते हैं दिमाग खाते है हमने सोचा कि चलो कविता के साथ,साथ कचहरी में भी किश्मत आजमाते हैं हमने अगले दिन जाकर कचहरी में एक बड़े वकील साहब से बात की वकील साहब बोले-कोई बात नहीं आप…

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#Gazal by Dr. Raghvendra Mishra Pranay

तलवारों  से  जब भी  कभी  सवाल  हुआ समझो एक  सवाली  तभी  हलाल  हुआ।   अपने  घर का  झगड़ा  खुद  सुलझा  लेना जहाँ सियासत  पहुँची  वहाँ बवाल  हुआ।   सभी  भेड़ियों   ने   मिलकर   तैयारी   की जबसे   सुना  मेमना  कहीं   बहाल  हुआ।   सत्ता   कैसे    सबको  अपना   घर    देगी रामलला का घर भी जब  तिरपाल  हुआ।   पापों   को   धुल    कैसे   स्वर्ग   सिधारेंगे तोड़  रही  दम  गंगा , देख  मलाल  हुआ।   दारू – मुर्गा  पाकर  मैकू  …

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#kavita by Tejvir Singh Tej

मङ्गलाचरण में भगवान शिव स्तुति   –   दोधक/बन्धु/मधु छंद   –  शिल्प-भ भ भ+गु+गु हे! अभयंकर हे! अविनाशी। नाथ सनाथ करो दुःखनाशी। को शिव शंकर तो सम दानी। रावण लंक दई रजधानी।। देव महा तुम हो नटराजा। साधहु मोर करो शुभकाजा। भूत गणादिक दास तुम्हारे। नाग गले भव के भय हारे।। राजत भाल सदा शशि गंगा। प्रेतहि-भूत नचाय मलंगा। वास करै शमशान सुखारी। देह भभूत रमा त्रिपुरारी।। भूतपती भगवान पिनाकी। सामप्रिया कर कोर कृपा की।…

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#Kavita by md juber husain

आजादी जब हम थे सोए तब कोई ख़्वाब था आया किसी अपने ने ही खून था बहाया,,,,,, लेकर निशानी हम भूल गए उनकी कुर्बानी किसी अपनो ने ही आज़ाद हिन्द का मसाल था जलाया,,,,, यहाँ कभी था शोर शराबा खुब चली थी गोली हमें तो दे दी आजादी ख़ुद तो खेला खून की होली,,,,,, गुजरती हवाओं ने भी कहा यही हैं सुरवीरों की नगरी उन्होंने भी ऐसा फरमान किया जाते-जाते तिरंगे को सलाम किया,,,,,, सोई…

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"#Kavita by md juber husain"

#Kavita by Shashikant shandile

(हाल ही में घटी एक घटना पर आधारित) ==* दो टुकड़ो में पड़ी थी बेटी *== दो टुकड़ो में पड़ी थी बेटी तड़प तड़पकर माँ को पुकारे माँ मै तुझसे प्यार हु करती जैसे हो माँ मुझे बचाले माँ जो आई देख वो मंजर होश तो जैसे उसने गवायें नम आँखोंसे कोशिश माँ की बेटी को वो गले लगाये टुकडे वो माँ कैसे समेटे मदत मांगते वो गिड़गिड़ायें लोग खड़े थे जैसे तमाशा कोई मदत…

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"#Kavita by Shashikant shandile"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

गिर के फिर संभलने का, मज़ा ही कुछ और है ! अपने पैरों से चलने का, मज़ा ही कुछ और है ! प्यार में चोट खाने का अफसोस न करो दोस्त, मोहब्बत में बिछड़ने का, मज़ा ही कुछ और है ! ज़िन्दगी जीने के लिए कोई तिकड़म न लगाइये, सिर्फ अपनी तरह जीने का, मज़ा ही कुछ और है ! अपने अमोल रिश्तों को दौलत से न तौलिये कभी, अपनों के आगे झुकने का, मज़ा…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Kavita by Brij Vyas ( Bhagwati Prasad Vyas “Neerad” )

” सचमुच सच्चा सखा चाहिये ” !! अंतर्मन के भाव हमारे , अधरों के मधुगान हमारे ! अनुभूति की हर तरंग को – छू लें जब उन्मान हमारे ! जीवन में जो राज छिपे हैं , उनके लिए दिशा चाहिए | दिल से दिल की गहराई तक , बचपन से ले तरुणाई तक ! रोम रोम में रचा बसा हो – साँसों की जो गहराई तक ! खुशियां जिसकी झोली में हो , रास रचाती…

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"#Kavita by Brij Vyas ( Bhagwati Prasad Vyas “Neerad” )"