#Kavita by Binod Kumar

विधा:-मनहरण घनाक्षरी शिल्प:-८,८,८,७ चार चरण सम तुकांत। —————————————- पुंसरी मिशाल बना, जब इस देश में तो। हसूरी भी आगे बढ़, सबको चौंका दिया। एक गुजरात गाँव, एक उत्तरप्रदेश। ठान लिया जन ने तो, उसे चमका दिया। सीसीटीवी वाईफाई, सभी विद्यालय भाई। स्वर्ग की तरह गाँव, लगता बना दिया। सभी सुविधा से लैस, गाँव बना कैस लेस, सुनी जो खबर यह, मन को हिला दिया। बिनोद कुमार”हंसौड़ा”४/०६/१७ दरभंगा(बिहार)

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#Kavita by Lal Bihari Lal (Lal Kala Manch)

पर्यावरणीय गीत– प्रदूषण का नंगा दानव ** प्रदूषण का नंगा दानव नाच रहा है दुनिया में इस दानव को रोको वरना आग लगेगी दुनिया में प्रदूषण का नंगा दानव…….. रो रही है धरती मैया, रो रहा आसमान है वन धरा से सिमट रहे है, मिट रही पहचान है मीठा जहर नित घूल रहा है स्वच्छ निर्मल पनिया में प्रदूषण का नंगा दानव…….. जल,थल पवन और गगन सभी हो गये इसके शिकार जीव-जन्तु, मानव और पादप…

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"#Kavita by Lal Bihari Lal (Lal Kala Manch)"

#Kavita by Manoj Kumar Yadav

अभी हाथों की हल्दी छुटी न थी मेंहदी का रंग भी गया न था अभी हाथों की लाली मिटी न थी आंखों से काजल गया न था क्यों बीच भंवर में छोड़ दिया प्रियतम मुंह मुझसे क्यों मोड़ लिया मैं चिड़िया बाबुल के अंगना की सब छोड़ तुम्हारे संग आई तज कर निज पहचान रंग तुम्हारे मैं रंग आई यूं रूदन हेतु क्यों छोड़ दिया प्रियतम मुंह मुझसे क्यों मोड़ लिया मेरी बिंदिया,मेरे कंगना रातों…

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"#Kavita by Manoj Kumar Yadav"

#Lekh by Pankaj Prakhar

भारत का महान सम्राट अकबर नही महाराणा प्रताप थे लेखक :- पंकज “प्रखर” कोटा (राजस्थान) राजस्थान की भूमि वीर प्रसूता रही है इस भूमि पर ऐसे-ऐसे वीरों ने जन्म लिया है जिन्होंने अपने देश की रक्षा में न केवल अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया बल्कि शत्रुदल को भी अपनी वीरता का लोहा मानने पर विवश कर दिया | लेकिन दुर्भाग्य ये रहा की हमारे देश का इतिहास ऐसे मुर्ख पक्षपातियों द्वारा लिखा गया जिन्होंने…

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#Kavita by VINAY KUMAR SAMADHIYA

पिता प्रेम की गंगा है , माँ ममता की धार सही पिता खजाना खुशियों का, माँ खुशियों का संसार सही दिखता नहीं प्रेम पिता का, बस अनुभव ही होता है , डांट जो देता बच्चों को , अन्दर ही अन्दर रोता है , कुटिल भाव दिखते है ऊपर , भीतर से कोमल मलमल सा हाव ना दिखते भाव ना दिखते , अद्भुत नजारा संबल का , देखी है दुनियां उन्ने भी , उनका भी अपना…

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"#Kavita by VINAY KUMAR SAMADHIYA"

#Gaszal by Dr. Sulaxna Ahlawat

आज अफ़साना ऐ मोहब्बत लिख दूँ, सोचती हूँ तेरे नाम एक खत लिख दूँ। जो लबों पर आकर ठहर गयी मेरे, सोचती हूँ वो ही हकीकत लिख दूँ। वफ़ा के सिवा कुछ नहीं मेरे पास, आ तेरे नाम मैं ये वसीयत लिख दूँ। तेरी मजबूरियों को समझा था मैंने, क्यों नहीं हुई पूरी इबादत लिख दूँ। बेवफ़ाई नहीं की हमने एक दूजे से, क्यों अधूरी रह गयी चाहत लिख दूँ। आज भी दिल में तेरा…

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"#Gaszal by Dr. Sulaxna Ahlawat"

#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

तुम मेरी चाहतों में हरवक्त बेशुमार हो! तुम मेरी धड़कनों में आ जाते हर बार हो! अब मुश्किल बहुत है रोकना तेरे सुरूर को, तुम मेरी निगाहों में ठहरा हुआ खुमार हो!

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"#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

सब कुछ लुटा कर, कुछ मिला तो क्या मिला, अरे इज़्ज़त गवां कर, कुछ मिला तो क्या मिला ! सारी ज़िन्दगी तो गुज़ार दी बेचारगी में हमने, अपनी मौत पा कर, कुछ मिला तो क्या मिला ! शराफत की ज़िन्दगी न जीने दी किसी ने भी, यारो आँखें दिखा कर, कुछ मिला तो क्या मिला ! देखा है बड़े गौर से ईमान ओ करम अपनों का, गैरों से रिश्ते जोड़ कर, कुछ मिला तो क्या…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Kavita by Brij Vyas ( Bhagwati Prasad Vyas “Neerad” )

” गगन से उतरी परियां मां की – अंतरिक्ष को छू लें हम ” !! गणवेश किया है धारण , बस्ता पीछे लाद लिया है ! मास्टरजी का होमवर्क भी , हमने रट्टा मार लिया है ! धूलभरी राहें आतुर हैं – स्वागत को अपने हमदम !! हाथ थाम कर हाथों में , हमको राह नई गढ़ना है ! बाधाएं हैं कई सामने , हमको बस पढ़ना पढ़ना है ! खेल कूद में अव्वल आकर…

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"#Kavita by Brij Vyas ( Bhagwati Prasad Vyas “Neerad” )"