#Kavita by Brij Vyas

” पल मुस्कराने लग गये ” कदम क्या संभले हमारे , वे पास आने लग गये | अपना पराया पहचानने में , हमको जमाने लग गये | आंसुओं ने पाला पोसा , रिश्ते पुराने कह गये | दहलीज़ तक ना थे गंवारा , दिन पुराने लद गये | अपना नहीं बेगाना समझा , रिश्ते निभाने लग गये | आज वे हमदर्द बनकर , झूंठे फसाने कह गये | दगा करते आये हमसे , वे आज़माने…

Share This
"#Kavita by Brij Vyas"

#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA

न करनी है तुम्हें मदद, तो खुलेआम मत करिये ! मगर किसी की इज़्ज़त का, क़त्लेआम मत करिये ! ये दौलतें ये सौहरतें कभी साथ नहीं जातीं दोस्त, इस बेकार की चीज पर, इतना गुमान मत करिये ! आता है तुम्हारे दर पे कोई तुम्हें अपना समझ कर, यारो उसको ज़लील करने का, इंतज़ाम मत करिये ! ख़ुदा भी न कर सका कुछ भी मदद के बिना “मिश्र”, तुम तो बन्दे हो उसके, ज्यादा अभिमान…

Share This
"#Gazal by SHANTI SWAROOP MISHRA"

#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev

मेरा ख्याल तेरी यादों से डर जाता है! मेरे दर्द को दिल में गहरा कर जाता है! जब भी करीब आती हैं बारिशों की बूँदें, मौसम चाहतों का अश्कों से भर जाता है!

Share This
"#Muktak by Mithilesh Rai Mahadev"

#Kavita by Vikram Gathania

फक्कड़ों की छोटी सी आधी अधूरी दुनिया एक आदमी था एक बूढ़ा आदमी भी था एक बुढ़िया थी बूढ़ा बुढ़िया दम्पति थे फिर एक आदमी का जिक्र इसलिए है कि वे परस्पर के पड़ोसी थे क्योंकि धरती पर अकेले जिया नहीं जाता आदमी फक्कड़ था बस कंडक्टर था शराबी था इस तरह वह अकेला ही जिया था वैसे तो बूढ़ा बुढ़िया भी फक्कड़ थे बूढ़ा पत्थर तोड़ता था दिन भर दूर जा जाकर रोजी रोटी…

Share This
"#Kavita by Vikram Gathania"

#Kavita by Lal Bihari Lal ‘ lal kala manch ‘

एक हजल-धरा पर पेड़ न रहे…. लालबिहारी लाल धरा परपेड़ न रहे तो सोचों क्या होगा न येंजमीं न ओ आसमां होगा….. न येचाँद न तारे न ये मौसम होगा हर तरफशोर ही शोर और धुआं होगा पेड़-पौधेपोषक हैं जीव – जन्तु के धरा काहै गहना,इसको बचाना होगा रहे नपेड़ तो जीवों का जीना मुश्किल जीवो केखातिर वन लाल रोपना होगा धरा परपेड़ न रहे तो सोचों क्या होगा न येंजमीं न ओ आसमां होगा…..…

Share This
"#Kavita by Lal Bihari Lal ‘ lal kala manch ‘"

#Kavita by jitendra sen

होली गीत।। _गमो का छोड़ कर आँचल ख़ुशी घुल जाये होली में।_ _हमारे दिल की हर नफरत दुआ बन जाये होली में।_ _सिकबे और गिलो के रूख़ सारे सूख जाएँ और,_ _ख़ुशी की डालियों में एक कमल खिल जाये होली में।_ _न हो नफरत किसी से भी दिलों में प्रेम आ जाये।_ _हरेक दिल में मधुरता की मधुर शोगात छा जाये।_ _प्रथक इस बार की होली जरा कुछ इस तरह की हो,_ _किशन के संग…

Share This
"#Kavita by jitendra sen"