#Kavita by Ishq Sharma

एक पैग़ाम ‘माँ’ के नाम “”””””””””””””””””””””””””””””””””””” माजी, अम्मा, आई, माँ, मेरी अपनी पुरवाई, माँ। “”””””””””””””””””””””””””””””””””””” पुचकारती  बे’वक़्त भी, वो कैसे

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#Kavita by Nitish Kumar Rajput

बैठे बैठे कुछ यूँ ही…   घर मेरा जन्ऩत है,और माँ,बहनें मेरी परियां हैं.. पत्नी मेरी राधा जैसी,हम उसके सावरियां

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#Kavita by Sonika Mishra

मुझे भी कभी, निहारा करो, सांसो में तुम्हारी, बस जाऊँगी। दिल में मेरे कभी, आया करो पलकों में तुम्हारी, ठहर

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#Kavita by Kapil Jain

•••क्षणिकाएं•••••   1) बातो से तेरी.. रचना रच जाती है कविता लिखता मैं.. बाते कविता जैसी तुमको आती है…  

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