#Shayari by Sanjay Ashk Balaghati

लड-खडाकर कदम सम्भल क्यूं नही जाते जैसे वो बदले वैसे हम बदल क्यूं नही जाते हमे तन्हा छोड जो खूश है अपनी दुनिया मे उनसे पुछो वो सिने से निकल क्यू नही जाते   ** बडती शराब की दुकाने कहती है जिंदगी से हर आदमी परेशान है होश मे मतलबपरस्त है फितरत मदहोशी मे ही लोग बनते इंसान है   ** तन्हाई का आलम है और सूखी है आंखे, दर्द सारे आह बनकर सायरी हो…

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#Kavita by Binod Kumar

विधा:-वीर/अल्हा छंद  -शिल्प:-१६,१५ चरणान्त गाल/२१ —– बार बार मेधा घोटाला, सही नहीं हो काँपी जाँच। होता अपना राज्य कलंकित, सदा साख पर आती आँच। जिसे कभी मिलता है अवसर, एक ध्येय पैसे की लूट। योग्य भले ही फेल हो रहे, माफिया राज रहे अटूट। अंग्रेजी की काँपी जाँचे, सदा पढ़ाते जो विज्ञान। नहीं ज्ञान पर टॉपर बनते, मेधा का छीने मुस्कान।

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#Kavita by Rajesh Teli Bhilwara

यूं किसी को सोचना बड़ा अच्छा लगता है . यों किसी के ख्याल में डूब जाना बड़ा अच्छा लगता है , जब भी आंखे बंद करूं तो उसी का चेहरा दिखता है  , यूं ही किसी को सोचना बड़ा अच्छा लगता है !   जब उसे अपने दिल की बात बताना चाहो तो डर लगता है , यूं ही किसी को सोचना बड़ा अच्छा लगता है !   जो होए तकलीफ मुझे तो उसकी आंख…

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#Gazal by Karan Bahadur Sahar

मैं आशिक़ी का नया फ़रमान ले के आया हूँ, ऐ ज़िंदगी तेरे लिए नया मेहमान ले के आया हूँ।   कोई पूछे तो सही कि मेरी इस जेब में क्या है, ज़िंदगी भर जिसे चाहा उसी की जान ले के आया हूँ।   मौत के बाद ख़ुदा ने पूछा कि क्या लाया धरती से, मैं बोला उस ज़मीँ के अधूरे अरमान ले के आया हूँ।   कुछ तो था उसमें जो उसे देख के सुकूँ…

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#Geet by Reeta Jaihind Arora

गीत   मेरे रश्के कमर तूने ब्रेड में बटर इतने ज्यादा लगाया , मजा आ गया भूख भी मिट गईं  , पेट भी भर गया तूने इतना खिलाया,  मजा आ गया मेरे रश्के कमर तूने ब्रेड में बटर इतने ज्यादा लगाया , मजा आ गया चावलों संग कढ़ी पकोड़ियां भी पड़ी तूने इतना पकाया ,मजा आ गया स्वाद भी बढ़ गया,  पेट भी भर गया तूने इतना खिलाया मजा आ गया मेरे रश्के कमर तूने…

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#Kavita by Ramkrishan Sharm Baichain

कह-मुकरी ————- मैं चलूँ तो पीछे आये। मैं रूकूँ तो वो रूक जाये। पास है पर है एक खाई। का सखि साजन? ना परछाई! रोज रात को साथ सुलावै। दिन-भर की हर बात भुलावै। देखन में है थोडा भद्दा। का सखि साजन? ना गद्दा! आवत जावत मोय निहारे। ना सोचे ना बात बिचारे। जो देखत, सबै बताये देत निगोरा । का सखि साजन? ना सीसीटीवी कैमरा! बेर बेर निकट बुलावे। खुद में वो मोय दिखावे।…

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#Lekh by sameer shahi

आंदोलन अपने आस पास देखें, हर जगह कोई ना कोई आंदोलन चल रहा है. जाट आंदोलन, किसान आंदोलन, पटेल आंदोलन – आजकल के कुछ प्रचलित आंदोलन हैं. कुछ पुराने आंदोलन अगर याद करें तो ‘चिपको’ आंदोलन – नर्मदा बचाओ आंदोलन आदि के नाम याद आते हैं. अभी हाल में मध्यप्रदेश में ही किसानों ने ‘ जल – सत्याग्रह ‘ किया था जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा था – वे लोग कामयाब भी…

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#Kavita by vinay kumar samadhiya

” माॅ” ————————————- माॅ की ममता है सरल, निर्मल तरल सा भाव जीवन में बचपन बड़ा ,जहाँ रही मात की छाॅव जननी को दर्जा मिलौ, ईश रहे अकुलाय जा ममता की छाॅव को ,धरती पर दौड़े आए पलना घले घुटुअन चले, जा ममता की छाॅह धरती से गोदी पड़े ,सीने से लिए लगाय सुख अनुपम उत्तम भरी ,न ताको बर्मन होय माँ लल्ला के प्रेम में ,गए मुरली वाले खोय खाट खङारी खुद परै,बेटा को…

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#Muktak by Annang Pal Singh

प्रसन्नता की शत्रु हैं , इच्छायें अतिरिक्त. ! कम से कम यदि कामना,तो जन प्रेमासिक्त !! तो जन प्रेमासिक्त, कामनायें दुख देतीं ! चिन्ता, भय ,अवसाद, मुफ्त में जग से लेतीं !! कह ंअनंग ंकरजोरि,कामना और खिन्नता! दोनों एकइ रूप. हड़प करलें प्रसन्नता !! ** अभिमानी यदि देवता , तो वह दानव जान ! शिष्ट , नम्र, व्यवहारयुत, मानव देव समान. !! मानव देव समान , अहं जिसने ठुकराया ! देव ,दनुज बन जाय,अहं यदि…

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#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

इस ओर भी नेता हैं और उस ओर भी नेता इंसान भी मिलेगा? या बस नेता ही नेता जब राजनीति लाशों पर ही करनी है तुझे शम्शान को ही घर तू बना क्यों नहीं लेता? जन्मों का इंतिज़ार भला क्यों करेंगे हम इस जन्म में ही उनको सज़ा क्यों नहीं देता? जो देश भर का पेट भरते रहते हैं हरदम भरपेट देश उनको ग़िज़ा क्यों नहीं देता? सुखसुविधा का सामान सभी जोड़ लिया पर जीवन…

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"#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan"

#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

जब भी ख्यालों में यादों की लहर आती है! #दर्द की बेचैनी में रात गुजर जाती है! अश्कों में घुल जाता है ख्वाबों का आशियाँ, मेरी जिन्दगी को तन्हाई तड़पाती है!

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"#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘"