#Muktak by Sandeep Saras

तुम   परेशान   हो ,  हम   परेशान   हैं। तुम  भी  नादान  हो  हम भी नादान हैं।   जो भी आया  यहां  उसको जाना पड़ा, तुम भी मेहमान हो ,हम भी मेहमान हैं।।  – संदीप सरस~9450382515

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#Gazal by Ramshyam Haseen

  जैसी मर्ज़ी है तेरी, वैसी  कहानी लिख दे तू जो चाहे तो मेरे ख़ून को पानी लिख दे   ख़ून मक़तूल का कपड़ों पे मेरे है मुन्सिफ़ तू इसे चाहे तो क़ातिल की निशानी लिख दे     उसने लिक्खा है बहुत प्यार  है मुझसे उसको मैंने लिक्खा वो फ़क़त इसके मआनी लिख दे   उसको इक आँख सुहाता ही नहीं मैं, तो फिर अबके ख़त मैं वो मुझे दुश्मने-जानी लिख दे   काम…

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#Gazal by Rajesh Kamaal

ऊपर बहने लगा दर्द खतरे के निशान से दूर नहीं अब जिंदगी शिकारी के मचान से   उनसे मुहोब्बत की कि जिंदगी मिलेगी हमें क्या मिला अब ये कैसे बताऊँ इस जुबान से   दिल ही तो नहीं ख्वाब भी  टूटे हैं जीने के क़त्ल कर के मुहोब्बत का रहते हैं अनजान से   जमाने का डर इस कदर बैठा है नजरों में बाहर ही नहीं निकलते वो अपने मकान से   जान पाते जो…

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#Kavita by Kavi Nilesh

भरी पेट जनता सोती है, भूखा मर रहा किसान रे बोलो राम राम राम, बोलो राम राम हरी-भरी धरती को देखूं दिल मेरा भर जाता है फंदे पर भाई लटका है  दिल मेरा टूट जाता है सब कहते पार्टी बिगड़ी, बिगड़ गई सरकार रे हिंसा करने से अब क्या  सुधर गई सरकार रे? अपने कर्मों को अब सड़कों पर फेंका करते हैं ऐसा बेसुरा माहौल देख हम भी चौंका करते हैं स्मार्ट सिटी और भीम…

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"#Kavita by Kavi Nilesh"

#Gazal by Sawan Ajmer

  आँख हैरान है अब हमने ये क्या देख लिया ।। अपने जैसा ही कोई वहशी खुला देख लिया ।।   अब जो तस्वीर से निकले तो बताएँगे तुम्हें ।। हमने तस्वीर में रहते हुए क्या देख लिया ।।   अब ये ख़ुश नजरी ही पागल न बना दे मुझको ।। मेरी आँखों ने कोई अक्स ए हवा देख लिया ।।   जेहन ओ दिल में से नए पाँव निकल आये हैं ।। जबसे घुँघरू…

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#Muktak by Krishan Kumar Tiwari Neerav

स्वार्थ जब तक नहीं है नहीं पूँछता, कोई गम दूसरे का नहीं बूझता, इतने मतलब में है मस्त हर आदमी — मुझको लगता उसे कुछ नहीं सूझता ** गहरे भ्रम में छोड़ दिया है हमको जग निर्माता ने, सच से हमको दूर रखा है बिल्कुल जीवनदाता ने, सोते सपना, जगते सपना, सपना ही हम देख रहे ; सपनों में ही रखा है हमको पूरी तरह विधाता ने। **

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#Kavita by Nilamver Gangwar

देश की तरक्की पर एक कविता। . मँहगाई की मौत हो गई,भ्रष्टाचार सिमट गया रे । जुमलेबाजी में देश नही,सारा संसार निपट गया रे।।   कौन कह रहा देश में अपने,राम राज नही आया है । किसने जन धन के खाते में, काला धन नही पाया है ।।   काला धन आ गया, पाक को नानी याद दिला दी है । और किसान के चेहरे पर कैसी मुस्कान खिला दी है ।।   नौकरियों की…

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#Kavita by Mukesh Madhuram

कम रहना  तुम नम रहना जीवन में फिर भी दम रहना कम उठना अधिक झुकना बाधाओं में  सहर्ष रुकना ज्ञान पढ़ना विज्ञान गढ़ना बुद्धि रटना श्रद्धा डटना थकन उचट व्यथन सहना रूठों का तुम अपनापन रहना गुस्से में तुम बालपन रहना कम रहना  तुम नम रहना   शिखर चढ़ना घाटी उतरना पुष्प बनना सुगन्ध बिखरना जन हो तुम जन जन रहना मन हो तुम मन मन रहना कठिन डगर वसन्त हँसना जीवन में जीवन्तता चखना…

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#Kavita by Kavi G S Joshi

हास्य कविता ** अक्ल बाटने लगे विधाता, लंबी लगी कतारी । सभी आदमी खड़े हुए थे, कहीं नहीं थी नारी ।   सभी नारियाँ कहाँ रह गई, था ये अचरज भारी । पता चला ब्यूटी पार्लर में, पहुँच गई थी सारी।   मेकअप की थी गहन प्रक्रिया, एक एक पर भारी । बैठी थीं कुछ इंतजार में, कब आएगी बारी ।   उधर विधाता ने पुरूषों में, अक्ल बाँट दी सारी । ब्यूटी पार्लर से…

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#Kavita by Md Juber Husain

तारे जमी पर लाना हैं,,,   आसमा तक जाकर हमें, तारे जमी पर लाना हैं, रास्ते हो जाए कितनी भी लम्बी, मंजिल को तो पाना हैं…. हर गम को सहकर, मंजिल के उस छोर तक जाना हैं, हर उदास चेहरे पे, मुस्कान तो लाना हैं, आसमा तक जाकर हमें, तारे जमि पर लाना हैं…. हर पर्वत का शीर्ष झुकाना है, रास्ते हमें खुद बनाना हैं, नदी,झरने और सागर की तरह, हमें भी साथ-साथ लहराना हैं,..…

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#Kavita by Nirdosh Kumar

(आज शाम …….दिल्ली के नाम…) ऊष्णता और तपिस तन मन दोनों का था उहापोह या सरिश मृगमारीचों का था प्रश्नों का था बवंडर या घात का आडंबर बस मैं मूक खडा था पर मन दौड पडा था

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#Kavita by Alka Jain

झंडा ऊंचा रहे हमारा बिछोने पर नींद नहीं आती अर्थी बनवा दो यारो फूलों से काम नहीं चलेगा अंगारो पर सुला दो यारों आशियाने की दीवार पर अपनी तस्वीर छोड़ कर मैं सोना चाहता हू कफन ओड कर कफन बने तिरंगा प्यारा यारो यही है कोशिश यही है आरजू आपनी सरहदें लहू मांगती है  कुर्बानी के लिये हम को तैयार रहना होगा झंडा ऊंचा रहे हमारा यह जज्बा हर भारतीय मै होना चाहिेए बिछोने पर…

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#Kavita by Reeta Jaihind Arora

मेरी कलम में धार दे   माँ शारदे माँ सरस्वती  मेरी कलम में ऐसी धार  दे लिख सके सच्चाई जो मुझे ऐसा अनमोल उपहार दे बलदानियों  के त्याग गाथा को  सच्चा  यशगान दे देशद्रोहियों की गोली  खुद उनके सीने के पार दे माँ शारदे माँ सरस्वती मेरी कलम मैं ऐसी धार दे राह कठिन हो अगर डगर की उसे सुगम बना उस पार दे बहुत बह गया लहू सैनिक का पापियों को सुधार दे करुणानिधि…

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"#Kavita by Reeta Jaihind Arora"

#Kavita by Uday Shankar Chaudhary

प्रणय का दर्द ——— प्रणय का दर्द है गहरा किसे दिल चीर दिखलाऐं पत्थरों के शहर में हैं हकीकत किसको बतलाऐं  —— जमीं पर हो रहा है जो नहीं आभास उनको है महल वालों नजर खोलो रहा ना होश तुमको है —– लगाकर दिल जमीं से हम तड़पते रात दिन देखो मेरे कच्चे मकानों की अंधेरी रात तुम देखो —– नहीं पत्थर तू हो सकते शहर के बीच तुम रहकर प्रणय जिंदा रखूंगा मैं दर्द…

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#Kavita by Rishabh Tomar Radhe

कागजी फूल कभी महक नही सकते है पक्षी मिट्टी के कभी चहक नही सकते है पाके  रुपये कई लोग बहक जाते है एक हम ही है जो कभी नही बहकते है   प्रेम की बात बता घर मेरा उजड़ा है किसी अपने मेरे घर यहाँ जलाया है जता के प्रेम अदावत मुझे बनाया है लेके आये  अमृत विष मुझे पिलाया है आज राधे को श्मशान सा बनाया है   रक्षा करने को सुदर्शन उठा लो…

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"#Kavita by Rishabh Tomar Radhe"

#Kavita by Mohan Srivastava

🌷🌷अभिमत ईश्वर🌷🌷 ** अभिताप अभी अभिधेय नहीं , अभिधायिनी अभी  अभिधान न कर । अभिविश्रुत अभी  अनुबंध नहीं , अभिपन्न न अभिलिप्त लहर । अभिज्ञान अभी  अभिमान नहीं, अभिनंदित अभी अभिसार प्रहर । अभिज्ञात नही अभिआकांक्षी , अभिचार अभी  अभिमंत्र अधर । अभिनेय अभी अभिपूर्ण नहीं, अभिभूत अभी  अभिशप्त उमर । अभिदान कभी अभिग्रहण कभी , अभमंडित अभी  अभिमाद असर । अभिसायं अभी अभिसंबंध नहीं , अभिलक्ष्य अभी  अभिलीन उदर । अभिराम अभी अभिकाम अभी , अभिपूजित अभी  अभिभूत विवर । अभिसिक्त अभी …

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"#Kavita by Mohan Srivastava"

#Gazal by Kumar Vijay Rahi

अच्छा बनते बनते अच्छा टूट गया। फिर दिल के भीतर का बच्चा टूट गया। लाखों आंधी-तूफां झेले फिर भी क्यूं? आखर में बेचारा पत्ता टूट गया। अच्छी-खासी घर की गाडी चलती थी, जाने किस कारण से रस्सा टूट गया। चोरी करना उसका कोई काम ना था, दो दिन से था भूखा-प्यासा टूट गया। सच्चाई की कीमत देखी दुनियां में, अच्छे से भी अच्छा सच्चा टूट गया। भाभी के आने से तब्दीली आई, भाई से भाई…

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"#Gazal by Kumar Vijay Rahi"