#Kavita by Ved Pal Singh

सुबह होने को है …….. ये रात चुप चुप सी है तारे हैं मदहोश, चाँद की खबर नही कायनात खामोश। फलक है मुँह खोल रहा मुस्कुराने को, बस सुबह होने को है अँधेरा चुराने को। अँधेरी रात आखिरी सांस ले रही है, जैसे सैलाब में टूटी कश्ती खे रही है। बस थोड़ी देर बाकी है सुबह होने में, अंधियारे को धरती से जुदा होने में। पौ फटेगी और एक शोला निकलेगा, आफ़ताब बनकर एक गोला…

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"#Kavita by Ved Pal Singh"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

यहाँ कोंन है अपना कोंन पराया, वक़्त मिला तो देखेंगे, किसने दिल से दिल को मिलाया, वक़्त मिला तो देखेंगे ! कितनों ने वफ़ा से साथ निभाया, वक़्त मिला तो देखेंगे, यहां कितनों से हमने धोखा पाया, वक़्त मिला तो देखेंगे ! जीवन के पथ पर चलते चलते हम हार गए हम टूट गए, किस रस्ते ने हमको खूब सताया, वक़्त मिला तो देखेंगे ! सहते सहते अपनों की घातें दिल अपना हलकान हुआ, कब…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

“भारतीय किसान की कविता” जो भी पैदा हुआ है उसको एक दिन मरना पड़ता है देहकां की मज़बूरी जिसको हर दिन मरना पड़ता है सरे देश की भूख मिटाने को जो मेहनत करता है देश बता क्यूँ उसको अक़्सर फ़ाक़ा रखना पड़ता है राजनीति में हर दल ने बस भरमाया है और छला अधिकारों की मांग पे उसको मौत से लड़ना पड़ता है गोरे अंग्रेजों को देखा, अब देखे काले अंग्रेज तब भी रोना पड़ता…

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"#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan"

#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘

तुम मेरी यादों में आते किसलिए हो? तुम मेरे दर्द को बुलाते किसलिए हो? वक्त की दीवारों में दफ्न हूँ कबसे, तुम मेरी रूह को रुलाते किसलिए हो?

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"#Muktak by Mithilesh Rai ‘ Mahadev ‘"