#Muktak by Annang Pal Singh

जिम्मेदारी स्वयं की ले लो अपने हाथ ! फिर तुम खुद चल पड़ोगे निज सपनों के साथ !! निज सपनों के साथ,जगेगी उन्नत चाहत ! विकसित होगी प्रवल कामना जो दे राहत !! कह ंअनंग ंकरजोरि,शक्ति है अंदर भारी ! ले लो अपने हाथ स्वयं की जिम्मेदारी !! अनंग पाल सिंह भदौरिया ग्वालियर   जन्मा हूँ जिस देश में , उसकी शान महान. ! हिमगिरि सा पुण्यात्मा , सुरसरि सा वरदान !! सुरसरि सा वरदान…

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"#Muktak by Annang Pal Singh"

#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

किसी को अपनों की, बदहालियां नज़र नहीं आतीं ! खुद के भी बदवक़्त की, कहानियां नज़र नहीं आतीं ! सब को औरों में हज़ार कमियां तो दिखती हैं दोस्तो, मगर ख़ुद में किसी को, मदमाशियां नज़र नहीं आतीं ! करते हैं दिखावा प्यार का जो दिल में खोट रख कर, कभी उनके चेहरे पर, वो रमानियाँ नज़र नहीं आतीं ! अरे अब तो ईमान की बातें लिखना छोड़ दो “मिश्र”, अब कहीं भी ईमान की,…

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"#Gazal by Shanti Swaroop Mishra"

#Kavita by Brij Vyas

” खुश होकर – मौसम ने , रंग बिखेरे हैं ” !! तैरते सन्देश – हवा में , पा ही गये ! मूक थे अनुबन्ध – जुबां पे , आ ही गये ! सिलसिले – समझोतों के , बहुतेरे हैं !! प्यास अधरों पे – जगी तो , बढ़ती गयी ! श्वास काबू में – कहाँ है , थमती नहीं ! अनचाहे – प्रश्नों के लगे , कई फेरे हैं !! गात पुलकित – मन…

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"#Kavita by Brij Vyas"

#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

“राजनीति की कविता” धंधे और व्यापार हो रहे ,राजनीति में अब तो सौ के कई हजार हो रहे,राजनीति में अब तो जनता के ही बीच के प्रतिनिधि होते थे पहले तो पेश कई अवतार हो रहे,राजनीति में अब तो राज बदल लो चेहरे बदलो बदले मगर न किस्मत अलीबाबा के यार हो रहे,राजनीति में अब तो पर उपदेश कुशल बहुतेरे ब्रह्म सूत्र सत्ता का उपदेशक भरमार हो रहे,राजनीति में अब तो पढ़ लिखकर क्या होना,रोना…

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"#Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan"