#Kavita by Tej Vir Singh Tej

जय जय श्रीराधे…..श्याम ** कुंजन निकुंजन में खेल-खेल लुका-छिपी समझे हो मन-मांहि बड़े ही खिलार हौ। धार कें उंगरिया पै

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