#Muktak by Annang pal Singh

खुशियाँ हृदय विचारिये , खुशियाँ आतीं दौड़ ! दुख का किया विचार तो,दुख का बनता जोड़ !! दुख का बनता जोड़, सोच की ताकत. भारी ! सकारात्मक सोच हेतु , करिये तैय्यारी !! कह ंअनंग ंकरजोरि,सोच पथ चलती दुनियाँ ! दुख सोचो दुख मिले , खुशी से मिलतीं खुशियाँ !!   : आत्मीयता , समझ वा गहन प्रेम की राह ! इससे अंतर्जगत में पैदा होती चाह. !! पैदा होती चाह , स्वभाव न बने अचानक…

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"#Muktak by Annang pal Singh"

#Kavita by Tej Vir Singh Tej

जय जय श्रीराधे…..श्याम ** कुंजन निकुंजन में खेल-खेल लुका-छिपी समझे हो मन-मांहि बड़े ही खिलार हौ। धार कें उंगरिया पै थारी बिन पैंदे वारी करौ अभिमान बड़े तीक्ष्ण हथियार हौ। देखौ रण-कौशल हू भागि भये रणछोर अरे डरपोक कहा भौंथरी ही धार हौ। हमऊँ हैं ब्रजबासी झांसे में यों नाय आवैं तेज भले कितने हो पर तुम गमार हौ।   खेल रह्यौ घात कर जीत की न बात कर घने देखे तेरे जैसे कृष्ण-नंदराय जू।…

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"#Kavita by Tej Vir Singh Tej"