#Kavita by Ajeet Singh Avdan

विरह-व्यथा ~~ पीर-हृदय की देकर मुझको,इक दिन अब तड़पावोगी । स्मृतियाँ भी होंगी निष्क्रिय,दिन कितने यूँ आवोगी ।।   जीवन

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#Kavita by Gopal Kaushal

प्रेमचंद   कर्मभूमि ,गोदान जैसा जीवंत उपन्यास अब कहाँ मिलता हैं । बूढ़ी काकी, सुजान भगत-सा अब कथा पात्र कहाँ

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#Kavita by Ishq Sharma

जितनी तेज़ मैं दौड़ लगाया उतनी तेज़ बहती चली। हवा निरंतर आसमां से, ज़मी तक तेज़ बहती चली। •••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मद्धम-मद्धम,

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