#Kavita by Dhool Chand Meena

‘सावन की बरखा’   सावन के बादल,मंडराते आसमां पर। काली,घनघोर घटाएँ छा जाती मानो धरा पर। उमड़-घुमड़ कर आते बदरा,बरखा

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