#Kavita by Mohan Tiwari

किसे सुनाएँ दुःख किसान   किससे पीड़ा कहने जाएँ, किसे सुनाएँ दुःख किसान। जिम्मेदारी आँख मँूदकर, बैठी है बनकर अनजान।।

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