#Kavita by Bablu Kumar Rahi

उमंग   ऊषा-प्रभा बिखेरता नवल-यौवन छाई, नव-पथ खींच गई, नवीन-अंकुर का प्रादुर्भाव हुआ।तम को चिरता गमे-अनल अब स्थिर हुआ वर्षों

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