#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

जर्जर है बुनियाद, तो रंग कराने से क्या होगा ! बेज़ार है गर दिल, तो मुस्कराने से क्या होगा ! ज़िंदगी बिता दी पर न आयी दुनियादारी हमें, अब बूढ़े तोते को, क़ुरान पढ़ाने से क्या होगा ! बहता है जिस दिल में नफ़रतों का लावा यारो, भला उसे हर्फ़-ए-मोहब्बत, पढ़ाने से क्या होगा ! अपने कर्मों को सुधारे वो तब तो कोई बात बने, वर्ना उसके कुकर्मों पे, पर्दा गिराने से क्या होगा ! लिखा जो नसीब में कोंन टाल सकता है “मिश्र”, पर मरने से पहले, कफ़न मंगाने से क्या होगा  !

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