#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

अय ज़िन्दगी मत पूंछ, कि कितना करम बाक़ी है ! कितने तूफ़ान आने हैं, और कितना ग़म बाक़ी है  ! देखनी है अभी तो अपने परायों की असलियत भी, कितनों के दिल हैं पत्थर, कितनों में रहम बाक़ी है  ! छलती रही है ये दुनिया न जाने कितनी तरह से, देखना है कि लोगों में अभी, कितनी शरम बाक़ी है ! अरे न कर हौसले पस्त वरना तू कैसे जी सकेगा, न भूल कि दुनिया में अभी, कुछ तो धरम बाक़ी है ! न उलझ तू बीते ज़माने के उन फसानों से “मिश्र”, तेरी ज़िन्दगी का तो अभी, अंतिम कदम बाक़ी है  !

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