#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

हम ज़फाओं में बस उसकी, वफ़ा खोजते रहे ! हम तो शोलों में शबनम का, मज़ा खोजते रहे  ! लोग पी कर भूल जाते हैं, अपना भी घर मगर, हम तो नशे में भी उसका ही, पता खोजते रहे ! न छोड़ा कोई भी दाव उसने, गिराने का हमको, मगर हम तो उसकी चालों में, अदा खोजते रहे ! इस कदर बदल जाने का, न मिला सबब हमको, मगर रात दिन हम तो अपनी, ख़ता खोजते रहे ! निकाल फेंका दिल से हमें, कूड़ा समझ के “मिश्र”, पर हम थे कि उसमें भी यारो, नफ़ा खोजते रहे !

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# Lekh by Kavi Rajesh Purohit

आज के बच्चे कैसे कैसे ********* कवि राजेश पुरोहित भवानीमंडी, झालावाड़, राजस्थान हम बच्चों के हाथों में एंड्राइड मोबाइल दे

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