#Kavita by Vijay Narayan Agrwal

–:दरपन:–   बदला है प्यार मौसम,बदली हैं संविदायें। दरपन सवाल करता,कैसे उन्हें छिपायें।।   रीता है ग्यान दर्शन,भक्ती औ भावना

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