#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

–:मुक्तक:– 1 उत्कंठा अभिलाषा बिषयी,नही बुलाती राम को, रटती है बेकार की बातें,और गंवाती चाम को, जगा “भ्रमर” मृगतृष्णा,उर मेंग

Read more