#Kavita by Ranjan Mishra

काव्यरंजन  –  कृष्णऔर_धृतराष्ट्र मैं पाण्डव का शांतिदूत है युद्ध नहीँ चाहत मेरी मैं निरा-प्रेम प्रस्तावक हू है बुद्धि नहीँ दाहक

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# Gazal by Shanti Swaroop Mishra

यारो पत्थर दिलों से, कभी प्यार मत मांगो अपने जिगर के लिए, पैनी कटार मत मांगो जीना है गर प्यार से तो तन्हा जीलो मगर, किसी के साथ जीने का, इख्तियार मत मांगो न झेल पाओगे तुम इस मोहब्बत के झटके, तुम अपनी ज़िन्दगी का, खरीदार मत मांगो कभी खिज़ाओं में बहार नहीं आती है “मिश्र” गुलशन के काँटों से, फूलों सा प्यार मत मांगो

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