#Kavita by Salil Saroj

आज फिर छेड़ता हूँ शाश्वत तान वही, सुख-समृद्धि,धर्म,ज्ञान और विज्ञान वही, सिंधु के जिजीविषा का सम्मान वही, हिमालय के अविरल

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

वक़्त अच्छा है तो फिर भी, सर झुका कर चलिए ! क्या है भरोसा इसका, इससे तो बना कर चलिए !   जब मुश्किलों के अंधरे लगें घेरने बस तब के लिये, दौलत की रोशनी,अपनों का साया बचा कर चलिये !   ज़िन्दगी का सफर छोटा नहीं बहुत लंबा है दोस्तो, कल के सफ़र के लिये आज, रस्ते बना कर चलिये !   न करो ऐसा जो तुम्हारे कल को भी बिगाड़ दे “मिश्र”, चाहिये सुकून कल, आज दुनिया से बना कर चलिये !

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#Kavita by Binod Kumar

बाल मजदूर ———————————— शिक्षा सबके लिये जरूरी, क्यों शिक्षा से दूर। आज बड़े अफसर के घरों में, दिखे बाल मजदूर।

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