#Muktak by Vijay Narayan Agrwal

दोहा:- चलकर देखाअक्सर हि,मैंने अपनी चाल। तक्दीर वक्त के आगे,करती रही सवाल।। सोरठा:– अपने जिनके पास,वो अपनों से भिड़त हैं।

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#Kavita by Rajendra Bahuguna

अघोसित-युद्ध सब झण्डे  बदलो ,डण्डे  बदलो, राजनीति  हथकण्डे बदलो मन्दिर ,मस्जिद,गुरूद्धारों,चर्चों में,केवल साधू पण्डे बदलो अब राम  नाम  की  माला

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

सीख जाते हैं वचपन से ही, वो सबक जीने का  आ जाता है हौसला उन्हें, दर्द ओ ग़म पीने का     मेहनतकशों के बच्चे समझ जाते हैं जल्दी ही,  कि मेहनत ही इक रास्ता है, दुनिया में जीने का   कुछ कर गुज़रने का ख़्वाब रखते हैं वो आँखों में, वो जानते हैं मोल, अपनी मेहनत के पसीने का    नहीं मचलते कुछ पाने के लिए अमीरों की तरह, मगर ललक को, हिस्सा बना लेते हैं वो सीने का    शांती स्वरूप मिश्र  

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