#Kavita by Laxmi Tiwari

नारी 💐 नित्य नारी प्रीत की संकल्पना को स्वीकार दुदुंभी बजा दुष्टों को रण में ललकार स्वप्न के आशियानें से

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#Lekh by Sanjay Verma

मन्वन्तर संग्रह पर प्रतिक्रिया सामाजिक समरसता- सदभाव एवं विकास की वैचारिक  मन्वन्तर अवैतनिक-अव्यावसायिक -अनियतकालिक है|  संपादक हरिशंकर वट ने विभिन्न

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कभी बात भी होगी, कभी बेबात भी होगी, ज़िन्दगी लम्बी है यारो, मुलाक़ात भी होगी ! ग़मों के सिलसिले न रुकेंगे कभी भी दोस्त, कभी न कभी, खुशियों की बरसात भी होगी ! ज़िंदगी की राहें ज़रा सा संभल कर चलिए, स्वागत में उधर, काँटों की बारात भी होगी ! ये खेल है ज़िन्दगी का ज़रा हिम्मत से खेलिए, कभी जीते हो ठाठ से, तो कभी मात भी होगी ! आँखें खोल कर रखना ज़रा अपनों से “मिश्र”, सामने से मोहब्बत, पर पीछे से घात भी होगी  ! शांती स्वरुप मिश्र

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