#Lekh ( Samiksha) by M M Chandra

वरिष्ठ  व्यंग्यकार गिरीश पंकज जी द्वारा आपके मित्र के लघु उपन्यास  “प्रोस्तोर” की समीक्षा …………………………………………… औद्योगिक जगत के भयावह चेहरे

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

न जाने उसने कैसा, ये फसाद कर दिया ! प्यार की हवाओं में, कैसा विषाद भर दिया ! अपनी चाहतों की सूची थमा के हाथों में, अपनी ज़िन्दगी से हमें, आज़ाद कर दिया ! सोचते थे कि प्यार की कीमत नहीं होती, मगर मेरे इस ख़याल को, बेस्वाद कर दिया ! रहेगा अफ़सोस हमें ज़िंदगी भर दोस्तो, कि खुशियों के मकां में, ग़म आबाद कर दिया  ! सिरफिरों की दुनिया में कैसे जियेंगे “मिश्र,” हमें तो ज़फा की नगरी ने, बर्बाद कर दिया ! शांती स्वरुप मिश्र

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