#Kavita by Dr Prakhar Dixit

छंद-पंचचामर ** प्रथमं शैलपुत्रिश्च   प्रथम रूप स्वर्ण आभ, नमस्तुते गिरिसुता। स्थापना कुंभ की, जयति अंब जग हिता।।   तपोनिष्ठ

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