#Kavita by Mainudeen Kohri

प्यारो महारो राजस्थान ******* म्हानै  आच्छी  घणी  लागै म्हानै  बाली  घणी  लागै आ ” धरती है म्हारी स्यान प्यारो घणो

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#Gazal by Shanti Swroop Mishra

हर दिल में अजीब सी, मैं घुटन देखता हूँ ! पतझड़ से उजड़ा हुआ, मैं चमन देखता हूँ ! अब अंधेरों में जीना सीख लो दोस्त क्योंकि, सूरज की चमक में भी, मैं ग्रहण देखता हूँ  ! दुनिया न जाने किधर जा रही है या खुदा, हर तरफ इंसानियत का, मैं दमन देखता हूँ ! ग़मों का सैलाव उमड़ रहा है हर दिल में, दुनिया से दुखी लोगों का, मैं रुदन देखता हूँ ! तमन्ना है सबकी कि जीभर के जीलें मगर, हर आदमी के हाथों में, मैं कफन देखता हूँ !

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