#Kavita by Nawal Pal Prabhakar

प्रकृति शौंदर्य   सुबह का अलसाया हरियाली युक्त निखार लाता यौवन मधुषित तेरा चेहरा अर्द्धनिद्रा, नशीली आंखे अन्दर स्फुर्ति चेहरे

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#Gazal by Ishq Sharma

जब सवालों का जवाब वो हँसकर देती है अपनी मासूमियत से तर-बतर कर देती है ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• मैं तारीफ़ करता हूँ 

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#Lekh by Ravindra Bramar ( Ramesh Raj )

तेवरीः युवा आक्रोश की तीसरी आँख +डॉ . रवीन्द्र ‘भ्रमर’ ———————————————————————– ‘तेवरी’ के प्रति मेरा ध्यान निरन्तर आकर्षित होता रहा

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#Kavita by Rajendra Bahuguna

सियासी गुलामी भ्रष्टाचारों   की   आवाजें   जब  संसद   में  उठती है मां,बहनो की  इज्जत  चौराहों  में  खुलकर लुटती है कारागृह से

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