#Kavita by Ramesh Raj

जन-नेता लालबहादुर शास्त्री को समर्पित एक बाल-गीत || हम बचपन से लाल बहादुर तन से मन से लाल बहादुर। अन्यायी

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#Kavita by Rameshwari Nadan

हैवान मुखौटा पहनकर संत बना टी.बी अखबारों में बिक गयी इंसानियत शहर के बाजारों में   चकनाचूर हुआ विश्वास हैवान

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

जब चाहा तो पत्थरों को, भगवान् बना दिया ! जब चाहा तो घर आँगन की, शान बना दिया !   कितना मतलब परस्त है दुनिया का आदमी,     जब मतलब निकल गया, तो अंजान बना दिया !   मुझको हक़ नहीं अब अपनों को राय देने का,  यारो अपने ही घर में मुझे, मेहमान बना दिया !   बड़ी हसरतों से निभाया था हर रिश्ता मगर, ज़िन्दगी को इस आदत ने, शमशान बना दिया !    कहने को हम क्या कहें उन बेख़बर लोगों से, जिन्हें खुद की फ़ितरतों ने, शैतान बना दिया !   गर मोहब्बत भी करे कोई तो कैसे करे “मिश्र“, उसको भी आज लोगों ने, अहसान बना दिया !   शांती स्वरुप मिश्र

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#Kavita by Prashant Varshnay

*लाज तुम्हारी कहाँ बची अब, उम्र के कच्चे धागों में.. कहाँ भागोगी कहाँ छुपोगी, हैवानियति भरी बाजारों में… चीख पुकारें

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#Kavita by Rajendra Bahuguna

न्याय में अन्याय न्याय,न्याय से भीख न्याय की,न्यायालय में मांग रहा हैं अब गले में  शूली  संविधान  की  धाराओं  की

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#Muktak by Annang Pal Singh

सच्चे मित्र चुनाव  हित , आवश्यकता  एक. ! पढ़िये उत्तम पुस्तकें,नित नित सहित विवेक !! नित नित सहित विवेक,पुस्तकें पढ़ो

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#Kavita by Ashutosh Anand Dubey

परशुराम जन्मोत्सव पर सभी ब्राह्मण बंधुओं को जगाने वाली मेरी नयी कविता- वेदों का ज्ञानी प्रकाण्ड दर्पण है धर्म पुरातन

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