#Gazal by Ishq Sharma

ढूंढ़कर ले आओ बहाना किसीका चाहिए ही नही ठिकाना किसीका ••••••••••••••••••••••••••••••••• अक्सर पलकें भीग  जाती  है पर भूलना  नही है 

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#Gazal by Shanti swaroop Mishra

ख़्वाहिश नहीं है मुझ को, मशहूर होने की ! यूं ही चाहतों की चाहत में, मग़रूर होने की !   मैं तो लिखता हूँ सिर्फ अपनी ख़ुशी के लिए, न दिखती कोई वजह, मेरे मज़बूर होने की !   कोई जानता है मुझ को इतना ही काफी है, न पाली है मैंने तमन्ना, चश्मेबददूर होने की !   तड़पते ज़ज़्बात बस उकेर देता हूँ कागज़ पे,  न आती है कभी नौबत, दिल के चूर होने की !   देखता हूँ विषमताएं तो जी तड़पता है “मिश्र“, न रहती फ़िक्र मुझको, किसी से दूर होने की !   शांती स्वरूप मिश्र    

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#Kavita by Rajendra Bahuguna

लन्दन में क्रन्दन तुम चूनाव  लडोगे  भारत में विज्ञापन होगा लन्दन से हम प्रश्न पूछना चाहते हेै इस राष्ट्रभक्ति के

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#Kavita by Arun Sharma

ओ परिवर्तनशील हृदय अब, कबतक तू परिवर्तित होगा? झूम उठे मन का प्रांगण औ, स्नेहिल हृदय समर्पित होगा। * रास,

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