#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

ख़्वाहिश नहीं है मुझ को, मशहूर होने की ! यूं ही चाहतों की चाहत में, मग़रूर होने की ! मैं तो लिखता हूँ सिर्फ अपनी ख़ुशी के लिए, न दिखती कोई वजह, मेरे मज़बूर होने की ! कोई जानता है मुझ को इतना ही काफी है, न पाली है मैंने तमन्ना, चश्मेबददूर होने की ! तड़पते ज़ज़्बात बस उकेर देता हूँ कागज़ पे, न आती है कभी नौबत, दिल के चूर होने की ! देखता हूँ विषमताएं तो जी तड़पता है “मिश्र”, न रहती फ़िक्र मुझको, किसी से दूर होने की ! शांती स्वरूप मिश्र

Read more

#Lekh by Ramesh Raj

नव नवोन्मेषी साहित्य-साधक ‘ रमेशराज ’ +डॉ. रमेश प्रसून ————————————————– ‘ घर का जोगी जोगना, आन गाँव का सिद्ध ‘

Read more