#Gazalby Shanti swaroop Mishra

 गुज़रे हुए ज़माने, कभी भुलाये नहीं जाते ! कभी अपनों से मिले ग़म, बँटाये नहीं जाते !   ज़रा महफूज़ रखिये अश्क़ों को आँखों में, किसी को जिगर के धारे, दिखाए नहीं जाते !   कहीं छुपा के रख लो अपने सुनहरे लम्हें,    कभी ख़ुशी के वो ख़जाने, लुटाये नहीं जाते !   चाहत है अपनों की तो ज़रा गौर से परखो, यूं ही फ़िज़ूल में दिन बुरे, बुलाये नहीं जाते !   छोड़ो बात सब की खुद को बदलो “मिश्र“, यूं ख़ुदग़र्ज़ी से इधर काम, चलाये नहीं जाते!    शांती स्वरूप मिश्र  

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