#Kavita by Dr Prakhar Dixit

आत्मनिवेदन ——————- हे दीनदयाल दयानिधि प्रभु भवतारक नाथ कृपा करिए। हे गुणातीत राजीवनयन त्रय ताप विषम अघ आ हरिए।। हे

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#Muktak by Binod Kumar

हास्य कुण्डलियाँ करनी ओछा कर लिया,पतिदेव बोल भैंस। पत्नी क्रोधित हो गई,लगी जताने तैस। लगी जताने तैस,मामला सारा बिगड़ा। खाना

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#Kavita by Rajendra Bahuguna

भारत का भविष्य भानुमति  का कुडमा फिर तैय्यार होगया अब राहू,केतु,शनि मिला फिर यार होगया यहा राजनीति  में  अहंकार तो 

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#Kavita by Ramesh Raj

बंसी बारे मोहना नंदनदन गोपाल मधुसूदन माधव सुनौ विनती मम नंदलाल। आकर कृष्ण मुरारी, नैया करि देउ पार हमारी मीरा-गणिका

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#Kavita by Rajendra Bahuguna

मुर्दा-गुर्दा दिखा रहा हेै स्वर्ण भस्म को खाने वाले हमको फिटनेस सीखा रहे हैं क्यों चौबीस घण्टे आवारा साण्डो को

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#Geet by Ramesh Raj

-गीत- जिनके आचराणों के किस्से केंची जैसे हों, कैसे उनको गाँव  कहें जो दिल्ली जैसे हों। नहीं सुरक्षा हो पायेगी

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