#Kavita by shq Sharma

मजदूर या मजबूर °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° वो रोज कमाता रोज खाता शान ओ शौकत नही दिखाता अपना हो या कोई पराया अपनी

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#Dr Naresh Sagar

मजदूर दिवस बनाम मजबूर दिवस गीत मजदूर दिवस को , मजदूरों का उपहास समझता हूं भूख, गरीबी, लाचारी को ,इनका

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#Kavita by Dr Arvind Yadav

लोकतंत्र =======   लोकतंत्र जिसके मूल में है धर्म निरपेक्षता सामाजिक ,आर्थिक और राजनीतिक आजादी दलित ,पिछडों ,गरीबों की अभिव्यक्ति

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#Kavita by Dr Prakhar Dixit

शुभ्र मुकट वनमाल गरे, वपु नील बरन ज्यों श्याम घटा। राजीवनयन अलकैं कुंचित,  लख चंदवदन हिय ताप मिटा।। रघुनंदन जय

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#Kavita by Vijay Narayan Agrwal

–:हनुमत वंदना:–   विनय हमारी सुनकर हनुमत, दया भाव दिखला देना। काम-क्रोध-मद-लोभ से मुक्ती, कटुता को पिघलादेना।।     सजल

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#Gazal by Ramesh Raj

रुक्न के अनुसार हू-ब-हू, बिना मात्रा गिराए एक ग़ज़ल बहर-मुतफायलुन मुतफायलुन मुतफायलुन मुतफायलुन —————————————————- अब प्रान पर, मुसकान पर, पहचान

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