#Lekh by Ramesh Raj

जीवन के अंतिम दिनों में गौतम बुद्ध +रमेशराज ——————————————————————- सत्य और धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझाने के लिये समाजिक

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

वो उनको कोसते हैं, वो उनको कोसते हैं ! पर मिलजुल के सब, जनता को नोंचते हैं ! इन सियासी तमाशों को तो सब जानते हैं, अपने कुकर्मों को सब, औरों पर थोपते हैं ! लुटेरों को खुद ही तो सोंप देते हैं चाबियां, फिर वो चुपके, से लुटने का राज़ खोलते हैं ! अमीर खा ले माल अरबों का तो गिला नहीं, पकड़ के ये तो सिर्फ, गरीबों को ठोंकते हैं ! वतन की चिंता इधर न दिखती है किसी में, सिर्फ इक दूजे को, पटकने के दाव सोचते हैं ! जब पटकती है जनता तो याद आते हैं करम, न रहता हाथ कुछ भी, बस पसीना पोंछते हैं  ! शांती स्वरूप मिश्र

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#Kavita by Naaz Ozair

महीनों की कविता जनवरी, फरवरी , मार्च सूरज गॉड का टॉर्च । अप्रैल, मई , जून चल अपनी धून। जुलाइ,अगस्त,सितम्बर

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