#Kavita by Vicky Jane

धत्तेरे की….. =========================== अंधे से तूने नजरें मिलाई धत्तेरे की! अच्छे दिनों की आस लगाई धत्तेरे की!!   चिल्ला-चिल्लाकर तेरा

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#Kavita by Dr Prakhar Dixit

(कन्नौजी रसरंग)   नववधूटी की मन:स्थिति ————————————– किनैं सुनावैं गुईंयाँ मेरी ससुरा की ये  छोरी रे। बालम जी चंदा हमरे

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#Gazal by Ishq Sharma

कौन जीता है भला  समाज के लिए यहाँ तो वक़्त नही है नमाज़ के लिए ••••••••••••••••••••••••••••••••••• बीता तो कोई  आने

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