#Kavita by Naaz Ozair

दिनों की कविता संडे माने रविवार मंडे सोमवार , जो भी मिले दुनियाँ में सबसे करो प्यार। ट्यूसडे मंगलवार है

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

अलग अपना घर बसा कर, क्या मिला हमको ! रिश्तों को बेसबब तोड़ कर, क्या मिला हमको ! कभी कितना विशाल था अपने घर का आंगन, टुकड़ों में उसको बांट कर, क्या मिला हमको ! मुस्कराते थे कभी कितने फूल मन उपवन में, पर खुद ही उसे बरबाद कर, क्या मिला हमको ! सबसे अलग दिखने की चाहत का क्या कहिये, मगर खुद को यूं मशहूर कर, क्या मिला हमको ! सोचता होगा भगवान् भी सर पकड़ कर “मिश्र”, कि इस इंसान को बना कर, क्या मिला हमको ! शांती स्वरूप मिश्र

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