#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

ख़ुद ही काँटों भरे ये रास्ते, हम बनाते क्यों हैं ! यारो पत्थर दिलों से रिश्ते, हम निभाते क्यों हैं ! जब जानते हैं दुनिया की बेरुख़ी का आलम, तो औरों को खुद उजड़ के, हम बसाते क्यों हैं ! न समझता है कोई भी औरों की मुश्किल यारो, तो दिल में औरों के दर्दो ग़म, हम बिठाते क्यों हैं ! ज़रा सी बात पर कभी अपने पराये नहीं हो जाते, फिर दुश्मनों से दिल आखिर, हम लगाते क्यों हैं ! जो खड़ा था कभी साथ साथ हर कदम पे “मिश्र”, सबसे ज्यादा ही दिल उसका, हम दुखाते क्यों हैं ! शांती स्वरूप मिश्र

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#Gazal by Ishq Sharma

तुम हमारे बिना, हम तुम्हारे बिना जैसे  नदी हो कोई,  किनारे बिना •••••••••••••••••••••••••••••••• जी रहे हम इधर जी रहे तुम

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#Lekh by Vishal Shukla

प्रसंगवश हमारा प्यारा लोकतंत्र छोटी संख्या जब बड़ी संख्या पर प्रहार करती है तो समझिए वो नालायको का ही उद्धार

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