#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कहीं कोने में बैठ के, मैं रोना चाहता हूँ ! ग़मों को आंसुओं से, मैं धोना चाहता हूँ ! जाने कब मिलेगी घुटन से निज़ात यारो, पुरानी यादों को अब, मैं खोना चाहता हूँ ! कोई तो होगी तदबीर कि दुबारा जी लूँ, जीवन के धागों को, फिर पिरोना चाहता हूँ ! बहुत ख़्वाब देखे हैं मैंने रातों में जाग कर, अब दुनिया से बेखबर, मैं सोना चाहता हूँ  ! बहुत जी लिया मैं साजिशों के बीच “मिश्र”, नई दुनिया का सपना, मैं सजोना चाहता हूँ !

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#Lekh by Ramesh Raj

आचार्य शुक्ल की कविता सम्बन्धी मान्यताएं -रमेशराज ‘‘जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञान-दशा कहलाती है, उसी प्रकार हृदय की यह

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#Kavita by Dr Krishan Kant Dwivedi

कुछ चालबाज पंक्षी ———————-   कूद-कूद कर बदलते हैं डालियाँ और,सुविधाओं से लदी डालियों पर बना लेते अपने बसेरे/कुछ चालबाज

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