#Kavita by Dr Prakhar Dixit

जय देव गजानन नमो नम: ===================   हे लम्बोदर गिरजानंदन गजकर्ण गजानन भयहारी। जय वक्रतुंड हे महाकाय  तुम सूर्य कोटि 

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#Kavita by Subodh Srivastava

शिल्पकार ————   तुम, सचमुच महान हो शिल्पकार- तुम्हारे हाथ नहीं दुलारते बच्चों को न हीं गूंथते हैं फूल अर्धागनी

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#Lekh by Ramesh Raj

डॉ. नगेन्द्र की दृष्टि में कविता +रमेशराज ‘‘कविता क्या है? यह एक जटिल प्रश्न है। अनेक आलोचक यह मानते हैं

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

भला मुर्दों के शहर में, ज़िन्दगी का असर क्या होगा ! बनावट के इन मेलों में, सादगी का असर क्या होगा !   जिसने न कभी समझी, रहमो करम की भाषा यारो, उन पत्थर दिलों में कभी, बंदगी का असर क्या होगा !    जो जलते ही रहते हैं रात दिन, नफरतों की आग में, मैले दिलों में उनके, आशिक़ी का असर क्या होगा !   जिन्हें होता है नशा सिर्फ, अपनों का लहू पी कर ही,   ऐसी शैतान खोपड़ी में, मयकशी का असर क्या होगा !   टपकते हैं जुबाँ से जिनकी, ज़हरों से भरे अलफ़ाज़, उनकी कडुवी जुबान पे, चाशनी का असर क्या होगा !   शांती स्वरूप मिश्र    

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