#Kavita by Rajendra Bahuguna

सरकार की ना-समझी यदि किसी में हिम्मत है तो मठ, आश्रम में टैक्स लगओ मन्दिर,मस्जिद,गुरूद्धारों को कर निदान परिधी में

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#Tewari by Ramesh Raj

वर्णिक छन्द में तेवरी।। सत्ता की कुचालन कूँ राम-राम दूर से मकड़ी के जालन कूँ राम-राम दूर से, है प्रणाम

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#Kavita by Ishq Sharma

••••••••••••••••• माँ •••••••••••••••••• वो रग-रग से गुफ़्तगू किया करती थी। माँ मुझको कुछ यूँ जिया करती थी। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••• बिन दाँतोंके

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#Kavita Ved Pal Singh

गिरेबां तेरा भी कितना खराब………. तिल-तिल कटती है रोज़ जिंदगी, उम्र यूँ ही कट जाती है तमाम। ख्याल कर लें

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#Kavita by Binod Kumar

विषय-अपनापन विधा-दोहे १ अपनापन व्यवहार में,अगर कहीं दिख जाय। फिर तो मानो स्वर्ग ही,इस धरती पर आय। २अपनापन दिखता नहीं,दिखता

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