#Kavita by Binod Kumar

विधा:मनहरण घनाक्षरी   प्यारे बच्चे अच्छे बनो,नहीं कभी ताने सुनो। समय पर सारे काम,करना है ध्यान से।   ध्यान रखो

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

हमने तो अपनी ज़िन्दगी तमाम कर दी, अपनी तो हर सांस उनके नाम कर दी ! सोचा था कि कभी तो गुज़रेगी रात काली, पर उसने तो सुबह होते ही शाम कर दी ! समझ पाते हम मोहब्बत की सरगम को,   उसने सुरों की महफ़िल सुनसान कर दी ! कर लिया यक़ीन हमने भी उसके वादों पे, मगर उसने तो बेरुखी हमारे नाम कर दी ! हम मनाते रहे ग़म अपनी मात पर चुपचाप, मगर उसने तो मेरी चर्चा सरे आम कर दी ! ये खुदगर्ज़ी ही आदमी की दुश्मन है “मिश्र“, जिसने इंसान की नीयत ही नीलाम कर दी !   शांती स्वरूप मिश्र

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#Geet by Shashi Tiwari

हमनें तुम्हारें प्यार में सबकों भुला दिया, जो भी मिला खुदा से, सबकुछ लुटा दिया।   तेरे मेरे चाहतों से

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