#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

मोहब्बतों में दिल लुटाना, मेरी आदत है ! हर दर्द को सीने में छुपाना, मेरी आदत है ! कोई खून भी कर दे तो किसी का दोष क्या,    यारो क़ातिलों को घर दिखाना, मेरी आदत है ! कर लेता हूँ यक़ीं सब पर मैं आँखें मूँद कर,  हर किसी को राज़े दिल बताना, मेरी आदत है ! जानता हूँ कि डूब सकता हूँ गहरे दरिया में, मगर इन जोख़िमों को उठाना, मेरी आदत है ! ये न समझो कि कोई भी ग़म नहीं मुझे यारो, पर क्या करूँ खुशियाँ जताना, मेरी आदत है ! मत समझ लेना कि मैं नाकारा कायर हूँ “मिश्र“, बस दुश्मनों से भी प्यार पाना, मेरी आदत है !   शांती स्वरूप मिश्र

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

मैं अधूरी हसरतों का हिसाब क्या दूँ ! उमड़ती फ़ितरतों का हिसाब क्या दूँ ! न देखो मेरे चेहरे की ज़र्द रंगत कोई , मैं बिगड़ी किस्मतों का हिसाब क्या दूँ ! कैसे कटी है ज़िन्दगी दहशतों में मेरी, दुनिया की नफरतों का हिसाब क्या दूँ ! न रखा कभी वास्ता उन मेरे अपनों ने, मैं गैरों की रहमतों का हिसाब क्या दूँ ! दौड़ा किया मैं उम्र भर जीने की खातिर, यारो अपनी मेहनतों का हिसाब क्या दूँ ! मैं ढोया हूँ अकेले ही ज़िन्दगी को “मिश्र”, भला अपनी ख़ल्वतों का हिसाब क्या दूँ ! शांती स्वरूप मिश्र

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#Tewari by Ramesh Raj

।। रमेशराज की एक तेवरी ।। भीख में कोई खुशी माँगी नहीं जि़न्दगी से गिड़गिड़ाकर जि़न्दगी माँगी नहीं। जी रहे

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#Kavita by Rajendra Bahuguna

कविता में कान्ति अगर  मैं  भी  सियासत   में   भागीदार  हो जाऊँ धधकती आँच  से  निकली कविता मञ्च से गाउँ जुमलों 

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#Muktak by Dr Prakhar Dixit

(कन्नौजी रसरंग) मुक्तक   घन केश विमुक्त अलक उरझी कर पहुँची नैना रतनारे। अधराधर रक्तिम विधु आनन मकराकृति कुंडल मतवारे।।

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