#Kavita by Sushil Rakesh

सिपहसालार ———————   कल तलक रिमझिम बारिस की तरह सिपहसलाहकार थे गगन मंडल आज खिचिंयाते रेत के रेगिस्तान हैं जब-जब

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#Kavita by Ashrit Katheria

चलो नौनिहालो, बस्ता संभालो… “””””””””””””””””””””” हुईं  छुट्टी  खतम मौज-मस्तीं हज़म, नव शिक्षा-सत्र की अब ख़ुशी मना लो! चलो नौनिहालो… “”””””””””””””‘””””””””

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#Kavita by Surendra Kumar Singh Chans

जितना दर्द,उतना सकून जितनी बेचैनी,उतना चैन जितनी उदासी,उतनी खुशहाली जितना शोर  ,उतनी ख़ामोशी जितनी रफ़्तार,उतना ठहराव जितना प्रेम,उतनी नफरत जितनी

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