#Kavita by Govind Charan

ये बेमौसम  मुझको  खिलना  नही  आता। तुमसे मिलना चाहता हूं मिलना नही आता।। हरेक लब्ज ही के पीछे तूम्हे खोजे

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#Kavita by Devesh Dixit

वचपन  ।—- मौजमस्ती के दिन सब पुराने हुए। बचपना क्या गया क्या सयाने हुए।। कोई परियों के किस्से सुनाता नहीं।

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कभी अपनों से हम, अदावत नहीं करते ! मंज़ूर है झुकना मगर, बग़ावत नहीं करते ! जो भी सच है वो तो रहेगा सच ही हमेशा, कभी भी झूठ की हम, हिमायत नहीं करते ! मिलना वही है जो मंज़ूर है ख़ुदा को यारो, मुकद्दर से कभी हम, शिकायत नहीं करते ! चोट खा कर भी मुस्कराते रहते हैं हम तो, कभी किसी की भी हम, मज़म्मत नहीं करते ! किसी को ख़ुशी देना अपनी आदत है “मिश्र”, कभी मोहब्बतों की हम, तिजारत नहीं करते ! शांती स्वरूप मिश्र

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