#Kavita by Rajendra Bahuguna

वर्तमान न्याय पालिका और कार्य पालिका पर यह रचना सटीक बैठती है। नेता और कानून न्याय पालिका,कार्य पालिका में भी

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#Kavita by Babita Kumari

व्यथा गंगा मईया की(गीत)   गंगा मईया रो-रो कहे काहे उतारा हमें काहे उतारा अरे ओ भगीरथ काहे उतारा ब्रह्म

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#Kavita by Mam Chand Agrwal Vasant

और झमाझम बारिश   घुँघराले कुंतल से बादल,और झमाझम बारिश। घिर-घिर आए श्यामल-श्यामल,और झमाझम बारिश।   ठंडी-ठंडी पुरवाई में,दूर तलक

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#Kavita by Devesh Dixit

राष्ट्रीय एकता को समर्पित कविता। **     माहे रमज़ान में मालिक,यही है इल्तिजा तुझसे, महीने साल के मौला सभी

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#Gazal by Ramesh Raj

रुक्न के अनुसार हू-ब-हू, बिना मात्रा गिराए एक ग़ज़ल बहर-मुतफायलुन मुतफायलुन मुतफायलुन मुतफायलुन —————————————————- अब प्रान पर, मुसकान पर, पहचान

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

उम्र भर देखी हैं हमने, ये सियासतें कैसी कैसी घुस चुकी हैं नस नस में, ये वहशतें कैसी कैसी अब जीने की चाहतें भी मरने लगी हैं धीरे धीरे, अब भरने लगी हैं दिल में, हिकारतें कैसी कैसी इज़्ज़तों से खेलना ही आदमी का शगल है अब, यूं दिखने लगी हैं सामने, ये सौहबतें कैसी कैसी ख़ुदग़र्ज़ियों के धारे में बह गए न जाने कितने ही,  देखी हैं उजड़ते हमने भी, ये रियासतें कैसी कैसी भेजा था हमें तो खुदा ने सिर्फ मोहब्बतों के वास्ते,  मगर देखी हैं इधर हमने, ये अदावतें कैसी कैसी न समझो “मिश्र“कि ज़िन्दगी खुशियों का खेल है, भुगती हैं जाने हमने भी, ये जलालतें कैसी कैसी   शांती स्वरूप मिश्र

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#Kavita by Shashi Tiwari

तेरी हर चाल समझने लगे, आहिस्ता,,,,आहिस्ता, फिर भी प्यार तुझसे ही करते रहे, आहिस्ता ,,आहिस्ता, ज़ख्म इतने गहरे दिए कि

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