#Kavita by Roopesh Jain

तमन्नाओं पे शर्मिंदा अपनी तमन्नाओं पे शर्मिंदा क्यूँ हुआ जाये एक हम ही नहीं जिनके ख़्वाब टूटे हैं इस दौर से गुजरे हैं ये जान-ओ-दिल संगीन माहौल में जख़्म सम्हाल रखे हैं नजर उठाई बेचैनी शर्मा के मुस्कुरा गयी ख़्बाब कुछ हसीन दिल से लगा रखे  हैं दियार-ए-सहर१ में दर्द-शनास२ हूँ तो क्या बेरब्त उम्मीदों में ग़मज़दा और भी हैं अहद-ए-वफ़ा३ करके ‘राहत’ जुबां चुप है वर्ना आरजुओं के ऐवां४ और भी है डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’ शब्दार्थ: १. दियार-ए-सहर – सुबह की दुनियाँ २. दर्द-शनास – दर्द समझने बाला ३. अहद-ए-वफ़ा – प्रेम प्रतिज्ञा ४.

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#Gazal by Ishq Sharma

ग़ज़ल लिख वो  बात सारी गुन-गुनाते रहे हम वहीं के वहीं  रात सारी छटपटाते रहे ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• दर्द-ए-दिल ने दाँत भींचे 

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#Gzal by Shanti Swaroop Mishra

न मिलेंगे वो पल न जवानी मिलेगी, न अपनों की अब मेहरवानी मिलेगी ! क्या करोगे ले कर तलाशी घर की, हर जगह एक बेकल कहानी मिलेगी ! कहीं तो बिखरे हुए मेरे सपने मिलेंगे,   तो कहीं पर अंधेरों की रवानी मिलेगी ! मत देखिये इन दरो दीवारों को दोस्त, उधर भी आफतों की निशानी मिलेगी ! कहीं पर मिलेंगी ख्वाहिशें अधूरी सी,  कहीं पे टूटे रिश्तों की कहानी मिलेगी ! न खोजो खुशियों के ठहाकों को इधर,   इधर तो एक उजड़ी ज़िंदगानी मिलेगी ! न मिलेगा नफ़रत का एक ज़र्रा भी इधर, तुम्हें हर तरफ मोहब्बत दीवानी मिलेगी !   शांती स्वरूप मिश्र

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