#Kavita by Sushil Rakesh

मेरी गुजरिया ———   मेरी गुजरिया नन्हीं मुन्नी करती रहती चकर मकर भूख लगे रोती चिल्लाती बात करो  खूब मुस्काती

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#Kavita by Rajendra Bahuguna

क्या प्रभू राम-राज्य ऐसा होता है क्यों राम तुम्हारे नामो से महिसासुर  सबको काट रहे हैं अन्ध भक्त नरभक्षी बनकर

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#Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कटती है पतंग तो, उसकी कोई डगर नहीं होती  !  कहाँ पै जा अटकेगी, किसी को खबर नहीं होती ! ज़िन्दगी का पहिया कहाँ अटक जाये क्या पता, कब थम जाएंगी सांसें, किसी को खबर नहीं होती !  आदमी समेंटता है क्या क्या न जाने किसके लिए, बाद मरने के क्या होगा, किसी को खबर नहीं होती ! ख़ुशी से जीना है तो लोगों के दिल में जियो, वरना  नफ़रत से भरे लोगों की, किसी को खबर नहीं होती !   शांती स्वरूप मिश्र  

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